23 जून, 2026, बेंगलुरु
श्री ज्ञानेन्द्र डी. त्रिपाठी, अतिरिक्त सचिव (डेयर) एवं सचिव (भाकृअनुप) ने आज भाकृअनुप-भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-आईआईएचआर), बेंगलुरु का दौरा किया तथा बागवानी अनुसंधान, नवाचार, प्रौद्योगिकी व्यावसायीकरण तथा किसान-केन्द्रित विकास में संस्थान के उत्कृष्ट योगदान की सराहना की।

दौरे के दौरान श्री त्रिपाठी ने संस्थान की नर्सरी इकाई, क्षेत्रीय बाग, राष्ट्रीय बागवानी मेला प्रदर्शन क्षेत्र, बीज इकाई तथा मशरूम इकाई का भ्रमण किया। उन्होंने वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं के साथ संवाद किया तथा संस्थान में चल रही अनुसंधान गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। विशेष रूप से फल, सब्जियों, पुष्पों, औषधीय एवं सुगंधित पौधों तथा उभरती हुई बागवानी फसलों की उन्नत किस्मों एवं संकरों के विकास पर किए जा रहे अनुसंधान पर चर्चा की गई।
सचिव को फसल सुधार, जीनोमिक्स-सहायित प्रजनन, जीनोम संपादन, बीज उत्पादन, गुणवत्तायुक्त रोपण सामग्री उत्पादन, पादप संरक्षण तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के क्षेत्र में संस्थान की उपलब्धियों की जानकारी दी गई। उन्होंने बागवानी क्षेत्र में उत्पादकता, लाभप्रदता एवं स्थिरता बढ़ाने में योगदान देने वाली किसानोन्मुखी प्रौद्योगिकियों के विकास हेतु संस्थान के प्रयासों की सराहना की।

अपने संबोधन में श्री त्रिपाठी ने भाकृअनुप-आईआईएचआर के सशक्त अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र तथा प्रौद्योगिकी विकास एवं व्यावसायीकरण के क्षेत्र में उसकी उल्लेखनीय उपलब्धियों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि संस्थान में प्रौद्योगिकियों एवं बौद्धिक संपदा के प्रभावी व्यावसायीकरण के माध्यम से भाकृअनुप प्रणाली के प्रमुख राजस्व अर्जित करने वाले संस्थानों में से एक के रूप में उभरने की अपार क्षमता है। सचिव ने इस बात पर बल दिया कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में बागवानी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी तथा इस क्षेत्र में नवाचार, विविधीकरण, मूल्य संवर्धन एवं उद्यमिता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने वैज्ञानिकों को प्रभावी अनुसंधान जारी रखने तथा किसानों एवं कृषि-व्यवसायों तक प्रौद्योगिकियों के त्वरित हस्तांतरण के लिए उद्योगों के साथ सहयोग को और मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित किया।
डॉ. तुसार कांती बेहरा, निदेशक, भाकृअनुप-आईआईएचआर, ने गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया तथा संस्थान की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष 1967 में स्थापित भाकृअनुप-आईआईएचआर 54 बागवानी फसलों पर अनुसंधान करता है तथा अब तक 350 से अधिक किस्में एवं संकर तथा 150 से अधिक प्रौद्योगिकियाँ विकसित कर चुका है। इनमें से 157 प्रौद्योगिकियों का व्यावसायीकरण हेतु लाइसेंस प्रदान किया जा चुका है।
कार्यक्रम में डॉ. प्रवीण मलिक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ), एग्रीनोवेट इंडिया लिमिटेड (एजइन); डॉ. ए. साहू, निदेशक, भाकृअनुप-राष्ट्रीय पशु पोषण एवं शरीर क्रिया विज्ञान संस्थान; विभिन्न प्रभागों के अध्यक्ष, वैज्ञानिक, विद्यार्थी तथा कर्मचारी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए डॉ. प्रवीण मलिक ने एग्रीनोवेट इंडिया लिमिटेड (एजइन) की भाकृअनुप की प्रौद्योगिकी व्यावसायीकरण इकाई के रूप में भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भाकृअनुप-आईआईएचआर ने एग्रीनोवेट इंडिया की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने अनुसंधान उपलब्धियों को प्रभावशाली कृषि नवाचारों एवं सतत कृषि-व्यवसाय अवसरों में परिवर्तित करने के लिए प्रौद्योगिकी मूल्यांकन, बौद्धिक संपदा प्रबंधन, लाइसेंसिंग तथा उद्योगों के साथ साझेदारी के महत्व पर बल दिया।
(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु)







फेसबुक पर लाइक करें
यूट्यूब पर सदस्यता लें
X पर फॉलो करना X
इंस्टाग्राम पर लाइक करें