टिकाऊ भविष्य के लिए मानव, जानवर, पौधे तथा जल जीव को एक साथ लाने का प्रयास: एक स्वास्थ्य समन्वय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन

टिकाऊ भविष्य के लिए मानव, जानवर, पौधे तथा जल जीव को एक साथ लाने का प्रयास: एक स्वास्थ्य समन्वय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन

26 फरवरी 2026, श्री विजया पुरम

‘टिकाऊ भविष्य के लिए मानव, जानवर, पौधे तथा जल जीव को एक साथ लाना के प्रयास: एक स्वास्थ्य समन्वय पर राष्ट्रीय सम्मेलन आज भाकृअनुप–केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान, श्री विजया पुरम, में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

समापन समारोह के मुख्य अतिथि, डॉ. ए.के. नायक, उप-महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधनृ), भाकृअनुप, ने एक स्वास्थ्य के आवश्यक तत्वों पर केन्द्रित दो दिन के राष्ट्रीय कार्यशाला के सफल समापन के लिए आयोजक एवं प्रतिभागियों की तारीफ की। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि मिट्टी का स्वास्थ्य पौधों के स्वास्थ्य की नींव है, जो बदले में जानवरों के स्वास्थ्य, इंसानों के स्वास्थ्य तथा आखिर में पूरे इकोसिस्टम की स्वास्थ्य पर असर डालती है। वैश्विक पहलों का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने बताया कि एपएओ (FAO) ने पहले ही एक स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रम शुरू कर दिए हैं और इस बात पर ज़ोर दिया कि यह तरीका मिट्टी की स्वास्थ्य से शुरू होना चाहिए, फिर पौधों एवं जानवरों की हेल्थ की ओर बढ़ना चाहिए, साथ ही एक बड़े इकोसिस्टम के नज़रिए से पूरी खाद्य-श्रृंखला को कवर करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कुपोषण और एनीमिया जैसे असंक्रामक मुद्दे एक स्वास्थ्य  ढांचे में शामिल हैं और इन्हें बेहतर खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के ज़रिए हल करने की ज़रूरत है, जिसमें जैव-पोषण संवर्धन की रणनीतियाँ शामिल हैं जो खेती को इंसानी स्वास्थ्य से जोड़ती हैं।

National Conference on One Health Synergy: Integrating Human, Animal, Plant and Aquatic Life for a Sustainable Future Concludes

डॉ. नायक ने मिट्टी और पानी में फ्लोरोसिस और आर्सेनिक संदूषण जैसी चुनौतियों पर भी ज़ोर दिया, जो फसलों पर असर डालती हैं, खाद्य श्रृंखला में घुस जाती हैं, और आखिर में इंसानी स्वास्थ्य पर असर डालती हैं। उन्होंने एक स्वास्थ्य विचार को असरदार तरीके से पूरा करने के लिए मजबूत बहु-विषयी समन्वय और वैज्ञानिक क्षेत्र के बी समन्वय की अहमियत पर ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि भाकृअनुप ने इन उभरते मुद्दों को सुलझाने के लिए आईसीएमआर के साथ मिलकर काम करने वाले प्रोजेक्ट शुरू किए हैं और भविष्य में लागू करने के लिए काम की और काम की सिफारिशें देने के लिए वर्कशॉप की तारीफ की।

प्रोग्राम में डॉ. ए. वेलमुरुगन, सहायक महानिदेशक, (एसडब्ल्यूएम), भाकृअनुप; डॉ. एस. दिनेश कन्नन, आईएफएस, मुख्य संरक्षक वन संरक्षक (वन्यजीव), अंडमान एवं निकोबार द्वीप; डॉ. सुनीता रॉय, संयुक्त निदेशक, प्रशासन, पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवाएँ विभाग, अंडमान एवं निकोबार, भी मौजूद थीं।

डॉ. ए. वेलमुरुगन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस तरह की सम्मेलन देश भर के अनुसंधानकर्ता के लिए एक साथ आने, नॉलेज शेयर करने और अनुभव का आदान-प्रदान करने के लिए एक जरूरी प्लेटफॉर्म का काम करती है। उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप की खास द्वीपों की खास जैवविविधता, यूनिक जलवायु तथा काफी जीववैज्ञानिक तथा पर्यावरणीय महत्व की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के असर समय के साथ और ज़्यादा साफ़ हो गए हैं और इस बात पर ज़ोर दिया कि भूमि उपयोग के तरीके पारिस्थितिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। इसके अलावा, उन्होंने सभी हितधारकों से एक विस्तृत एक स्वास्थ्य अप्रोच अपनाने की अपील की, जो टिकाऊ विकास और पर्यावरणीय सुख-समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए कृषि, पशुपालन, खाद्य-श्रृंखला तथा मानव स्वास्थ्य को एकीकृत करता है।

National Conference on One Health Synergy: Integrating Human, Animal, Plant and Aquatic Life for a Sustainable Future Concludes

डॉ. एस. दिनेश कन्नन, आईएफएस, ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इंसान की भलाई के लिए एक स्वस्थ पर्यावरण एवं जानवर का स्वस्थ रहना भी उतनी ही आवश्यक हैं। उन्होंने कहा अनुसंधान र्च में नाकामी ही वो सीढ़ी है जो आखिर में सफलता और इनोवेशन की ओर ले जाती है। उन्होंने अंडमान और निकोबार आइलैंड जैसी दूर की जगह से वर्कशॉप को सफलतापूर्वक करने के लिए ऑर्गनाइज़र को बधाई दी। डॉ. सुनीता रॉय ने अंडमान और निकोबार प्रशासन द्वारा चलाई जा रही अलग-अलग योजनाओं के बारे में बताया और जैवविविधता पक्का करने तथा जानवरों एवं जन स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए मुख्य भूमि से लाए गए जानवरों के लिए निगरानी के तरीकों को मजबूत करने पर ज़ोर दिया।

इससे पहले, और डॉ. जय सुंदर, निदेशक, भाकृअनुप-सीआएआरआई तथा अध्यक्ष, अंडमान विज्ञान संघ के ने आए हुए मेहमानों का स्वागत किया और दो दिन की सम्मेलन के दौरान की गई गतिविधियों और उनके उम्मीद के मुताबिक नतीजों के बारे में संक्षेप में बताया। उन्होंने बताया कि पूरे देश से ऑनलाइन डेलीगेट्स समेत कुल 194 प्रतिभागियों ने सम्मेलन में हिस्सा लिया तथा लीड पेपर्स समेत 145 पेपर्स पेश किया गया।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान, श्री विजयपुरम)

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