8 मार्च, 2026, उमियम, मेघालय
उत्तर-पूर्व भारत में ‘कृषि विस्तार शिक्षा एवं परामर्श सेवा प्रणाली के रूपांतरण: विकसित भारत 2047 हेतु नीतिगत दृष्टिकोण (टी-एईएएस-एनईआई 2047)’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन आज केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालयृ, इम्फाल, के अंतर्गत आने वाले कृषि विज्ञान में स्नातकोत्तर अध्ययन महाविद्यालय (सीपीजीएसएएस), उमियाम, में हुआ।
यह कार्यशाला डॉ. अनुपम मिश्रा, कुलपति, सीएयू, इम्फाल के मार्गदर्शन में आयोजित की गई, जिसमें देशभर से नीति-निर्माता, कृषि वैज्ञानिक, विस्तार विशेषज्ञ, शिक्षाविद एवं विकास कार्यकर्ता शामिल हुए। सभी ने उत्तर-पूर्व क्षेत्र में कृषि विस्तार शिक्षा तथा परामर्श सेवाओं को सुदृढ़ करने पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम के दूसरे दिन विषय-आधारित समूह चर्चाएं और प्रस्तुतियां आयोजित की गईं। विशेषज्ञों ने बाजार-उन्मुख विस्तार, मूल्य श्रृंखला विकास, शासन सुधार, संस्थागत समन्वय तथा विस्तार प्रणालियों में नीतिगत नवाचार जैसे प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की। प्रतिभागियों ने क्षेत्र में कृषि विस्तार सेवाओं की वर्तमान स्थिति का विश्लेषण किया और किसान-केन्द्रित विस्तार प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए व्यावहारिक नीतिगत सुझाव प्रस्तुत किया, जो विकसित भारत 2047 की परिकल्पना के अनुरूप है।

समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. राजबीर सिंह, उप महानिदेशक (कृषि विस्तार), भाकृअनुप, ने कृषि में उभरती चुनौतियों से निपटने हेतु डिजिटल प्रौद्योगिकियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सहयोगात्मक संस्थागत ढाँचों के माध्यम से कृषि विस्तार प्रणालियों के आधुनिकीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने किसानों के कल्याण एवं विस्तार तंत्र को मजबूत करने में डिजिटल कृषि प्लेटफॉर्म की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया।
डॉ. सिंह ने बताया कि ‘एग्रीस्टैक’ और ‘भारत विस्तार’ जैसी राष्ट्रीय पहलें देशभर के किसानों के लिए एकीकृत डिजिटल इकोसिस्टम विकसित करने का लक्ष्य रखती हैं। उन्होंने किसानों के अनुभव, नवाचार और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान हेतु राष्ट्रीय किसान मंच की स्थापना का सुझाव दिया तथा ग्रामीण युवाओं को कृषि एवं कृषि-उद्यमिता से जोड़ने के लिए 12 मार्च को प्रस्तावित “युवा कृषि मंत्र” के गठन की बात कही।
उन्होंने किसानों, विस्तार कर्मियों और अन्य हितधारकों के लिए डिजिटल कृषि में क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर जोर देते हुए सुझाव दिया कि आईआईटी तथा शोध संस्थान उपयुक्त प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित करें। कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके), कृषि विश्वविद्यालयों, प्रगतिशील किसानों, नवप्रवर्तकों एवं फार्म एम्बेसडर्स की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने भौतिक और वर्चुअल दोनों माध्यमों को समाहित करने वाले डिजिटल विस्तार मॉडल को बढ़ावा देने पर बल दिया। उन्होंने “एक राष्ट्र, एक कृषि, एक टीम” की संकल्पना को दोहराते हुए कहा कि इस कार्यशाला से प्राप्त निष्कर्ष राष्ट्रीय कृषि विस्तार परिप्रेक्ष्य से जुड़े योजना में योगदान दे सकते हैं।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. अनुपम मिश्रा ने वर्ष 2047 तक भारत को 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के अनुरूप भविष्य उन्मुख कृषि विस्तार रणनीति की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि पहले कृषि प्रगति मुख्यतः पारंपरिक विस्तार विधियों और व्यक्तिगत संवाद पर आधारित थी, जबकि अब रिमोट सेंसिंग, सैटेलाइट इमेजरी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल एनालिटिक्स एवं भाषा अनुवाद उपकरण नई संभावनाएं प्रदान कर रहे हैं।

डॉ. मिश्रा ने सैटेलाइट आधारित फसल निगरानी, उत्पादन आकलन और बाजार नियोजन की संभावनाओं को रेखांकित करते हुए किसानों एवं विस्तार कर्मियों में डिजिटल साक्षरता तथा मानव संसाधन क्षमता को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने मत्स्य, पशुपालन एवं बागवानी जैसे संबद्ध क्षेत्रों में विस्तार रणनीतियों को सुदृढ़ करने, क्षेत्र-विशिष्ट प्रदर्शन मॉडल विकसित करने तथा निजी क्षेत्र की नवाचारी पहलों से सीख लेने पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम के एक प्रमुख सत्र में प्रो. सनासम रणबीर सिंह, प्रोफेसर एवं सहायक अधिष्ठाता, कंप्यूटर विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग, आईआईटी, गुवाहाटी, ने “एआई इकोसिस्टम के माध्यम से कृषि रणनीति: विकसित भारत 2047 का निर्माण” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कृषि उत्पादकता, बाजार पहुंच एवं जलवायु अनुकूलता बढ़ाने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल कृषि प्लेटफॉर्म और डेटा-आधारित परामर्श सेवाओं की परिवर्तनकारी क्षमता को रेखांकित किया।
इस सत्र में डॉ. एम.एम. अधिकारी, पूर्व कुलपति, बिधान चंद्र कृषि विश्वविद्यालय (बीसीकेवी ), पश्चिम बंगाल; डॉ. जे.पी. शर्मा, पूर्व कुलपति, एसकेयूएएसटी-जम्मू; डॉ. वी.वी. सदामते, पूर्व सलाहकार (कृषि), योजना आयोग; डॉ. के.डी. कोकाटे, पूर्व उप-महानिदेशक (कृषि विस्तार), भाकृअनुप; डॉ. पी. दास, पूर्व उप-महानिदेशक (कृषि विस्तार), भाकृअनुप; तथा डॉ. डी बसु, कुलपति, उत्तर बंगा कृषि विश्वविद्यालय (यूबीकेवी), पश्चिम बंगाल, के साथ-साथ कई विशिष्ट विशेषज्ञों ने भी भाग लिया और उत्तर-पूर्व क्षेत्र के लिए विस्तार शिक्षा एवं नीतिगत ढांचे को सुदृढ़ करने पर अपने विचार साझा किया।
(स्रोत: कृषि विस्तार प्रभाग, भाकृअनुप)







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