19 जनवरी, 2026, देहरादून
आज भाकृअनुप–भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून में यूएनईपी–टीईईबी एग्री फूड द्वारा फंडेड प्रोजेक्ट 'ट्रू वैल्यू अकाउंटिंग: भारत तथा केन्या में खाद्य प्रणालियों में बदलाव के लिए आर्थिक आधार बनाना' के तहत उत्तराखंड राज्य के लिए एक उच्च-स्तरीय हितधारक परामर्श बैठक का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन भाकृअनुप–भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम ने जी. बी. पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान (जीबीपीएनआईएचई), अल्मोड़ा; भाकृअनुप-आईआईएसडब्ल्यूसी, देहरादून; और भाकृअनुप-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा, के सहयोग से संयुक्त रूप में किया।
परामर्श का मुख्य उद्देश्य टीईईबी फ्रेमवर्क के अनुसार प्राकृतिक, उत्पादित, मानव तथा सामाजिक पूंजी का आकलन और मूल्यांकन करने के लिए परिदृश्य, संकेतक एवं कार्यप्रणाली विकसित करना था, जिसमें उत्तराखंड के अल्मोड़ा, पौड़ी गढ़वाल और हरिद्वार जिलों पर विशेष ध्यान दिया गया।
वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया, जिनमें मुख्य अतिथि के रूप में श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम (भारतीय प्रशासनिक सेवा), प्रमुख सचिव–योजना, उत्तराखंड सरकार; सम्मानित अतिथि के रूप में डॉ. के. रविचंद्रन, निदेशक, भारतीय वन प्रबंधन संस्थान, भोपाल; तथा विशेष अतिथि के रूप में डॉ. भानु पिंगले, भारतीय वन सेवा, सीएएसएफओएस शामिल थे।
उद्घाटन स्वागत संबोधन, डॉ. सुनील कुमार, निदेशक, भाकृअनुप-आईआईएसआर, ने दिया, जिसके बाद डॉ. एम. मधु, निदेशक, डॉ. लक्ष्मी कांत, डॉ. के. रविचंद्रन (निदेशक, आईआईएफएम, भोपाल), तथा श्री रूबेन गर्गन (प्रोजेक्ट मैनेजर, यूएओनईपी टीईईबी एग्री फूड) ने सत्र में अपनी बात रखी।
परामर्श को तीन विषयगत सत्रों में: (i) "ट्रू वैल्यू अकाउंटिंग – प्रकृति के मूल्यों को आर्थिक निर्णयों और नीति में लाने का एक उपकरण" पर उद्घाटन सत्र, (ii) टीईईबी फ्रेमवर्क, पूंजी-आधारित मूल्यांकन, तथा उत्तराखंड के लिए संकेतक चयन पर केन्द्रित परिचयात्मक और परिदृश्य निर्धारण सत्र, और (iii) पूंजी अनुमान एवं एकीकरण के लिए मसौदा कार्यप्रणाली पर समीक्षा सत्र का प्रवधान किया गया था।
प्रत्येक सत्र का समापन इंटरैक्टिव समूह चर्चाओं, प्रतिक्रिया को प्रोत्साहित करने और प्रस्तावित तरीकों के सहयोगात्मक परिष्करण के साथ हुआ। टेक्निकल चर्चाओं को डॉ. मेराज आलम अंसारी (भाकृअनुप-आईआईएफएसआर), इंजीनियर हिमांशु जोशी (जीबीपीएनआईएचई), डॉ. रमन जीत सिंह (भाकृअनुप–आईआईएऐसडब्ल्यूसी), तथा डॉ. प्रकाश चंद्र घसाल (भाकृअनुप–वीपीकेएएस) ने अपनी टीम के सदस्यों के साथ मिलकर सुविधाजनक बनाया और मॉडरेट किया।
दिन भर का कार्यक्रम एक समापन सत्र के साथ खत्म हुआ, जिसमें मुख्य बातों पर चर्चा हुई और उत्तराखंड के पहाड़ी कृषि संदर्भ में टीवीए फ्रेमवर्क के पायलट इम्प्लीमेंटेशन के लिए आगे का रास्ता बताया गया। यह कंसल्टेशन इकोसिस्टम सर्विस वैल्यूएशन को क्षेत्रीय कृषि योजना और पॉलिसी बनाने में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस कंसल्टेशन में 20 से ज़्यादा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों और विभागों के 100 से ज़्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिसमें विशेषज्ञ, अधिकारी और प्रैक्टिशनर एक साथ आए और टिकाऊ कृषि-खाद्य प्रणालियों से मिलने वाली इकोसिस्टम सेवाओं के मूल्यों को इंटीग्रेट करने की रणनीतियों पर चर्चा की।
(स्रोत: भाकृअनुप–भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून)







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