18 फरवरी, 2026, आंध्र प्रदेश
भाकृअनुप-राष्ट्रीय वाणिज्यिक कृषि अनुसंधान संस्थान, राजमुंदरी, ने आज ब्लैक सॉइल रिसर्च फार्म - कथेरू, भाकृअनुप-निक्रा, राजमुंदरी, में जर्मप्लाज्म क्षेत्र दिवस का आयोजन किया।
डॉ. शेषु माधव, निदेशक, भाकृअनुप-निक्रा, ने कमर्शियल फसलों के बचाव, मूल्यांकन एवं इस्तेमाल में जर्मप्लाज्म की अहम भूमिका पर ज़ोर दिया। उन्होंने किसानों के सामने आने वाली नई चुनौतियों से निपटने तथा व्यवसायिक फसलों के मूल्य श्रृखला सिस्टम में हितधारक की जरूरतों को पूरा करने के लिए लक्षित प्रजनन कार्यक्रम में जर्मप्लाज्म के इस्तेमाल की अहमियत पर ज़ोर दिया। इसके अलावा, उन्होंने भविष्य की रिसर्च पहलों को संस्थान के नए तय किए गए कामों के साथ जोड़ने की वकालत की।

डॉ. के. सरला, हेड, फसल सुधार प्रभाग, ने कथेरू फार्म में अभी चल रही जर्मप्लाज्म गतिविधि का अवलोकन प्रस्तुत किया तथा बताया कि जर्मप्लाज्म क्षेत्र दिवस अनुसंधानकर्ता के बीच तंबाकू जर्मप्लाज्म के बारे में जागरूकता पैदा करेगा ताकि इसका सही इस्तेमाल किया जा सके।
प्रतिभागियों को तंबाकू जर्मप्लाज्म देखने के लिए फील्ड विज़िट पर ले जाया गया, जिसमें एफसीवी, नॉन-एफसीवी तथा जंगली निकोटियाना स्पीशीज़ के 28 अलग-अलग टाइप शामिल थे, साथ ही उनकी खासियतों के बारे में भी बताया गया। फार्म में रखे गए मिर्च और अश्वगंधा जर्मप्लाज्म के बारे में भी डिटेल में जानकारी दी गई। इसके अलावा, रिलीज़ हुई वैरायटी के बीज प्रोडक्शन प्लॉट दिखाए गए, और उनकी खासियतों के बारे में बताया गया।
बीएसआरए फार्म में 2,500 से ज्यादा जर्मप्लाज्म पंजीकरण दिखाए गए, जिसमें तंबाकू के 2,100 पंजीकरण, अश्वगंधा के 380 पंजीकरण और मिर्च के 65 पंजीकरण शामिल थे।

प्रतिभागियों को तंबाकू, मिर्च और अश्वगंधा के जर्मप्लाज्म के अलग-अलग मॉर्फोलॉजिकल लक्षणों को देखने का मौका मिला। व्यवसायिक खेती के अलग-अलग एरिया में मौजूद जेनेटिक विविधता का इस्तेमाल करने के फैसले लिए गए।
इस इवेंट में वैज्ञानिक, तकनीकी अधिकारी तथा टकनीशियन समेत करीब 50 लोग शामिल हुए।
(स्रोत: भाकृअनुप-राष्ट्रीय वाणिज्यिक कृषि अनुसंधान संस्थान, राजमुंदरी, आंध्र प्रदेश)







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