प्रमुख उपलब्धियाँ

  • कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने और फसलोपरांत प्रबंधन में सुधार के लिए कुल 278 नई मशीनें, उपकरण और तकनीकें विकसित की गईंसाथ ही 168 प्रक्रिया प्रोटोकॉल और मूल्य संवर्धित उत्पाद तकनीकें तैयार की गईं, ताकि विविध और उन्नत कृषि-खाद्य प्रसंस्करण को सुदृढ़ किया जा सके।

  • कुल 37,104 कृषि मशीन प्रोटोटाइप तैयार किए गए और परीक्षण तथा क्षेत्र स्तर पर उपयोग के लिए हितधारकों को वितरित किए गए। इसके अतिरिक्त, 844 कृषि उपकरण और मशीनरी का प्रदर्शन 28,269 हेक्टेयर क्षेत्र में आयोजित किए गएताकि मशीनरी की उपयोगिता दिखाई जा सके और इन्हें व्यापक रूप से इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

  • भारत में 392 एग्रो-प्रोसेसिंग सेंटर (APCs) स्थापित किए गएजो रोजगार सृजन, मूल्य संवर्धन और खाद्य प्रसंस्करण एवं फसलोपरांत प्रबंधन में उद्यमियों की क्षमता निर्माण को बढ़ावा देते हैं।

  • मुख्य दलहन (Major Pulses) की खरीद के लिए शेल्फ लाइफसुरक्षित भंडारणमिलिंग आउटटर्न और संकेतक मानदंड तैयार किएजो उपभोक्ता मामलों के विभाग, भारत सरकार द्वारा दलहन की खरीद के लिए इसे मानक के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

  • गेहूं और चावल के 3 वर्ष के भंडारण में हानियों का मूल्यांकन FCI और CWC गोदामों में किया गया और अध्ययन की सिफारिशें उपभोक्ता मामलों के विभागभारत सरकार द्वारा 01.01.2022 से लागू की गईं।

  • गन्ने की कलियोंको छोटे-छोटे टुकड़ोंमें बोने वालीरोपाई मशीन विकसितकिया गया और कृषिमशीनरी निर्माताओं को इसकालाइसेंस दिया।

  • जूट के त्वरित गलाने (retting) की तकनीक (NINFET-Sathi) से रेशे की गुणवत्ता में 1-2 ग्रेड का सुधार होता है।

  • जूट, मेस्ता और बिमली रेशों की ग्रेडिंग के लिए BIS मानक IS:7032-2020 स्थापित किया गया।

  • कपास के डंठलोंसे बनेब्रिकेट और पेलेटनवीकरणीय ऊर्जा केप्रभावी स्रोत केरूप में कामकरते हैं। कपासके डंठलोंके टुकड़ेकिसानों के लिएअतिरिक्त आय केअवसर प्रदान करतेहैंऔरमहाराष्ट्र के विदर्भक्षेत्र में कईब्रिकेट और पेलेटबनाने वाले उद्यमसफलतापूर्वक चल रहेहैंजोस्थानीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्णयोगदान दे रहेहैं।

  • या परत वाले फेस मास्क उत्कृष्ट सांस लेने की क्षमता और उच्च फ़िल्ट्रेशन दक्षता वाले, 100% कपास की डबल फैब्रिक संरचना से तैयार किए गए।

  • भारत का पहला नैनो सेल्युलोज़ प्लांट ICAR-CIRCOT, मुंबई में स्थापित किया गया।

  • लाह उत्पादन तकनीकें विभिन्न होस्ट जैसे Flemingia semialata, बेर, Calliandra calothyrsus के लिए मानकीकृत की गईं। C. calothyrsus को दोनों लाह कीट स्ट्रेन के लिए उत्कृष्ट होस्ट पाया गया।

  • Flemingia semialata के विभिन्न इंटरक्रॉपिंग मॉडल विकसित किए गए ताकि ग्रीष्म और शीतकालीन मौसम में लाह उत्पादन के साथ अन्य फसलों का भी प्रभावी उपयोग हो सके।

  • प्रोटीन आइसोलेट पाउडर बनाने के लिए पायलट प्लांट ICAR-CIPHET, लुधियाना में स्थापित किया गया।

  • टेक्नोलॉजी और मशीनरी प्रदर्शन मेला हर साल AICRP केंद्रों के माध्यम से आयोजित किया जा रहा है।

  • फसल कटाई और कटाई-उपरांत हानि, गोदाम दक्षता और अनाज भंडारण प्रबंधन पर राष्ट्रीय स्तर के अध्ययन किए गए, जिससे खाद्य अनाज हानियों में महत्वपूर्ण कमी और राष्ट्रीय एजेंसियों के लिए वार्षिक बचत सुनिश्चित हुई।

  • अंगूरfumigation चेंबर और SO₂ एवं CO₂ फ्यूमिगेशन प्रोटोकॉल विकसित और लागू किए गए, जिससे अंगूर के अंतर्राष्ट्रीय निर्यात में फल-मक्खी के संक्रमण को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सका।

  • गोदाम में दलहन भंडारण हानि का अध्ययन और लंबी अवधि भंडारण के लिए मानक सिफारिशें” परियोजना के लिएउपभोक्ता मामलों के विभाग के साथ MoUपर हस्ताक्षर किए गए, जिसमें मूंग, उड़द, चना, अरहर और मसूर जैसी प्रमुख दलहन शामिल हैं।

  •  प्याज भंडारण के लिए पायलट परियोजना मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के 4 स्थानों पर WRI, USA/ WRI, India के सहयोग से सम्पन्न किया गया।

 

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