19 सितंबर, 2026, पटना
भाकृअनुप–पूर्वी क्षेत्र अनुसंधान परिसर, पटना ने आज श्री ज्ञानेन्द्र देव त्रिपाठी, आईएएस, अपर सचिव (डेयर) एवं सचिव (भाकृअनुप), कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार तथा श्री नर्मदेश्वर लाल, आईएएस, प्रधान सचिव, कृषि विभाग, बिहार सरकार की मेजबानी की। इस दौरे का उद्देश्य राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य के अनुरूप विज्ञान-आधारित, मांग-आधारित और किसान-केन्द्रित कृषि अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी प्रसार को मजबूत करना था। डॉ. आर. के. सिंह, सहायक महानिदेशक (कृषि विस्तार) भी इस दौरान उपस्थित रहे।
दौरे के दौरान श्री त्रिपाठी ने भाकृअनुप-आरसीईआर द्वारा उभरती कृषि चुनौतियों के प्रति उत्तरदायी प्रौद्योगिकियों के विकास और प्रसार के उद्देश्य से चलाए जा रहे अनुसंधान कार्यक्रमों और क्षेत्र-उन्मुख पहलों की समीक्षा की। श्री एन. लाल के साथ उन्होंने प्राकृतिक खेती पर दीर्घकालिक परीक्षणों, बाजरा-आधारित फसल प्रणालियों, फल-आधारित विविधीकृत पोषण वाटिकाओं, सौर ऊर्जा-आधारित कृषि मशीनीकरण, स्मार्ट जल प्रबंधन इकाइयों सहित अनुसंधान पहलों और प्रदर्शन सुविधाओं का दौरा किया। उन्होंने जलवायु-लचीली किस्मों के विकास और भविष्य के जलवायु तनावों से निपटने की तैयारी को मजबूत करने के लिए रेनआउट शेल्टर और ओपन टॉप चैंबर्स सुविधाओं का भी अवलोकन किया।
गणमान्य व्यक्तियों ने संस्थान के एक और दो एकड़ के एकीकृत कृषि प्रणाली (आएफएस) मॉडल का भी दौरा किया, जिसमें सूक्ष्म और नैनो-गृहस्थी कृषि मॉडल शामिल हैं, तथा किसानों के खेतों में इनके प्रतिकृति और विस्तार की संभावनाओं पर चर्चा की। पशु फार्म में उन्होंने ब्लैक बंगाल बकरियों और मुर्रा भैंसों के आनुवंशिक सुधार तथा क्षेत्र के स्वदेशी पशुधन संसाधनों के लक्षण-निर्धारण और संरक्षण से संबंधित चल रही पहलों की समीक्षा की। दोनों गणमान्य व्यक्तियों ने संस्थान परिसर में संयुक्त रूप से एक पौधा भी लगाया।

इस अवसर पर भाकृअनुप-आरसीईआर की प्रौद्योगिकियों, अनुसंधान उपलब्धियों और किसान-केंद्रित नवाचारों को प्रदर्शित करने वाली एक प्रदर्शनी आयोजित की गई। गणमान्य व्यक्तियों ने संस्थान की प्रौद्योगिकी प्रसार पहलों से जुड़े सफल किसानों के साथ संवाद किया। रांची की श्रीमती अल्बिना एक्का, जिन्होंने एकीकृत कृषि प्रणाली दृष्टिकोण के माध्यम से लगभग 12 लाख रुपये की वार्षिक आय अर्जित की है, तथा रामगढ़ के श्री रामशरण, जो बकरियों और मछली पालन के साथ उन्नत क्यारियों पर साल भर सब्जी उत्पादन के माध्यम से लगभग 20 लाख रुपये की वार्षिक आय अर्जित करते हैं, ने प्रौद्योगिकी अपनाने और आजीविका में सुधार के अपने अनुभव साझा किए।
राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कृषि अनुसंधान के महत्व पर जोर देते हुए श्री ज्ञानेंद्र देव त्रिपाठी ने कहा कि अनुसंधान परिणामोन्मुखी, क्षेत्र-प्रासंगिक और उभरती चुनौतियों के प्रति उत्तरदायी होना चाहिए। उन्होंने वैज्ञानिक ज्ञान को ऐसी प्रौद्योगिकियों में तेजी से परिवर्तित करने के लिए वैज्ञानिक-किसान संबंधों को मजबूत करने का आह्वान किया, जो स्थिरता, संसाधन-उपयोग दक्षता और कृषि उत्पादकता में सुधार करें। उन्होंने उभरती कृषि चुनौतियों का समाधान करने और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का समर्थन करने के लिए अंतःविषयक एवं अभिसरण अनुसंधान, तेज प्रौद्योगिकी प्रसार तथा राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों के साथ निकट जुड़ाव पर भी जोर दिया।
श्री एन. लाल ने भाकृअनुप-आरसीईआर, पटना के अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास संबंधी पहलों की सराहना की तथा क्षेत्र स्तर पर जलवायु-लचीली और किसान-केंद्रित प्रौद्योगिकियों के सत्यापन, व्यापक प्रसार और अंगीकरण के लिए संस्थान और राज्य कृषि विभाग के बीच निकट समन्वय के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बिहार के किसानों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप सहयोगात्मक अनुसंधान, प्रौद्योगिकी प्रोत्साहन और क्षमता निर्माण को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
डॉ. अनुप दास, निदेशक, भाकृअनुप-आरसीईआर, पटना, ने गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया और संस्थान के प्रमुख अनुसंधान कार्यक्रमों, बुनियादी ढांचे तथा प्रौद्योगिकी प्रसार पहलों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने जलवायु-लचीली कृषि, धान-परती प्रणालियों के सतत गहनता, बहु-तनाव फसल सुधार, उन्नत सब्जी और फल किस्मों, एआई/एमएल-सक्षम सटीक जल एवं पोषक तत्व प्रबंधन, किफायती कृषि मशीनीकरण, आजीविका संवर्धन के लिए एकीकृत कृषि प्रणालियों, बहु-स्तरीय कृषि वानिकी तथा पशुधन और मत्स्य पालन में नवाचारों पर संस्थान के कार्यों को रेखांकित किया। उन्होंने पूर्वी भारत की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए संस्थान के बहुविषयक दृष्टिकोण तथा राज्य विभागों, केवीके, किसानों और अन्य हितधारकों के साथ साझेदारी को मजबूत करने के प्रयासों पर जोर दिया। डॉ. दास ने बिहार सरकार द्वारा, विशेष रूप से जलवायु लचीली कृषि (सीआरए) कार्यक्रम, बिहार कृषि प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण संस्थान (बीएएमईटी) तथा अन्य के माध्यम से दिए जा रहे निरंतर सहयोग और सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम के दौरान गणमान्य व्यक्तियों द्वारा “पूर्वोत्तर एवं पहाड़ी किसानों के सशक्तिकरण के लिए प्रौद्योगिकी और संस्थागत तालमेल: भाकृअनुप-आरसीईआर की पहल” शीर्षक से एक प्रकाशन का विमोचन किया गया। इसके बाद केवीके सहित संस्थान के वैज्ञानिक, तकनीकी और प्रशासनिक कार्मिकों के साथ संवाद हुआ। संवाद में चल रही और उभरती अनुसंधान प्राथमिकताओं, अनुसंधान निधियों के विवेकपूर्ण उपयोग, अनुसंधान–विस्तार संबंधों को मजबूत करने और राज्य कार्यक्रमों के साथ अभिसरण से संबंधित विषयों पर चर्चा की गई।
गणमान्य व्यक्तियों ने किसानों, राज्य विभागों और अन्य हितधारकों के साथ सहयोग के माध्यम से मांग-आधारित, किसान-अनुकूल प्रौद्योगिकियों के विकास और प्रसार की दिशा में संस्थान के प्रयासों की सराहना की। इस दौरे ने पूर्वी भारत के लिए विज्ञान-आधारित, सहयोगात्मक और मांग-आधारित कृषि अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए आईसीएआर-आरसीईआर की प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट किया।
(स्रोत: भाकृअनुप–पूर्वी क्षेत्र अनुसंधान परिसर, पटना)







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