भाकृअनुप-आईआईएसडब्ल्यूसी अनुसंधान केन्द्र, वासद ने खेड़ा में एससीएसपी कार्यक्रम के तहत किसान सम्मेलन का किया आयोजन

भाकृअनुप-आईआईएसडब्ल्यूसी अनुसंधान केन्द्र, वासद ने खेड़ा में एससीएसपी कार्यक्रम के तहत किसान सम्मेलन का किया आयोजन

25 सितंबर, 2026, खेड़ा, गुजरात

भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, अनुसंधान केंद्र, वासद ने अनुसूचित जाति उप-योजना (एससीएसपी) कार्यक्रम के तहत गुजरात के खेड़ा जिले के तसरा तालुका के भद्रासा (जुन्ना मोवडा) गांव में एक प्रारंभिक किसान सम्मेलन का आयोजन किया।

इस कार्यक्रम में केंद्र की टीम, फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी (एफईएस) के फील्ड स्टाफ और गांव के कृषक समुदाय ने भाग लिया। एफईएस टीम ने भाकृअनुप-आईआईएसडब्ल्यूसी, अनुसंधान केंद्र, वासद की टीम का किसानों से परिचय कराया, जबकि ग्राम सरपंच ने केंद्र की टीम और प्रतिभागियों का स्वागत किया।

बातचीत के दौरान, केंद्र की टीम ने किसानों को एससीएसपी कार्यक्रम के उद्देश्यों तथा अनुसंधान केन्द्र, वासद द्वारा अपनी एससीएसपी गतिविधियों के माध्यम से हासिल की गई उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी। केंद्र ने एससीएसपी कार्यक्रम के तहत जुन्ना मोवडा गांव को औपचारिक रूप से अपनाने की घोषणा भी की और आने वाले वर्षों में गांव के समग्र विकास तथा इसके कृषक समुदाय के कल्याण के लिए सहयोग प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

ICAR-IISWC Research Centre, Vasad Organises Farmers’ Meet under SCSP Programme in Kheda

टीम ने कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए किसानों की सक्रिय भागीदारी और सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला तथा गांव के किसान समूह से अपेक्षाओं पर चर्चा की।

इसके बाद चालू वर्ष के लिए गतिविधि योजना तैयार करने हेतु एक विचार-विमर्श सत्र आयोजित किया गया, जिसमें पूंजीगत और परिचालन व्यय दोनों को शामिल किया गया। चर्चाओं के आधार पर, वर्ष के दौरान कार्यान्वयन के लिए ट्यूबवेल निर्माण, खेत समतलीकरण और खेत की मेड़बंदी सहित प्रमुख गतिविधियों को अंतिम रूप दिया गया।

किसानों ने चर्चाओं में उत्साहपूर्वक भाग लिया और गांव तथा इसके कृषक समुदाय के विकास में सहयोग प्रदान करने के लिए केंद्र के प्रयासों की सराहना की।

किसान सम्मेलन में 20 महिला किसानों सहित 80 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया और विचार-विमर्श में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून)

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