18 जून, 2026, पुत्तूर
भाकृअनुप-काजू अनुसंधान निदेशालय, पुत्तूर, कर्नाटक ने आज “काजू में प्रकृति-अनुकूल पोषक तत्व प्रबंधन” विषय के साथ अपना 41वां स्थापना दिवस मनाया। इस कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, किसानों, उद्यमियों, उद्योग से जुड़े हितधारकों और अधिकारियों ने भाग लिया और काजू क्षेत्र के विकास के लिए सतत मार्गों पर चर्चा की।
डॉ. जे. दिनाकरा अडिगा, निदेशक, भाकृअनुप-डीसीआर, ने पिछले वर्ष के दौरान निदेशालय की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और इसकी भावी कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने हाल ही में जारी की गई काजू की नई किस्म ‘नेत्रा समृद्धि’ सहित नवीन अनुसंधान प्रगतियों की जानकारी दी और उत्पादकता, स्थिरता और लाभप्रदता बढ़ाने के लिए किसान-केन्द्रित प्रौद्योगिकियों के विकास के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. ए.बी. पाटिल, अध्यक्ष, कृषि प्रौद्योगिकी संस्थान, बेंगलुरु, उपस्थित रहे। स्थापना दिवस व्याख्यान देते हुए उन्होंने पर्यावरण-अनुकूल पोषक तत्व प्रबंधन के महत्व पर जोर दिया और सतत फसल उत्पादन की आधारशिला के रूप में जैविक आदानों के उपयोग तथा मृदा स्वास्थ्य की बहाली की वकालत की। उन्होंने काजू उत्पादकों को विभिन्न सरकारी सहायता योजनाओं के माध्यम से मूल्य संवर्धन और कृषि उद्यमिता के अवसरों का लाभ उठाने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. के.बी. हेब्बार, निदेशक, सीपीसीआरआई, कासरगोड तथा श्रीमती ममता डी.एस. गट्टी, अध्यक्ष, कर्नाटक काजू विकास निगम, मंगलुरु उपस्थित रहीं।
इस अवसर पर उत्कृष्ट वैज्ञानिकों को उनके उच्च गुणवत्ता वाले शोध प्रकाशनों के लिए सम्मानित किया गया। निदेशालय ने कई प्रकाशनों, अपनी उपलब्धियों को प्रदर्शित करने वाले एक वीडियो तथा “काजू कनेक्ट” नामक एक एआई-संचालित चैटबॉट का भी विमोचन किया, जिसे काजू उत्पादकों को समयबद्ध परामर्श सेवाएं और तकनीकी जानकारी प्रदान करने के लिए विकसित किया गया है।
कार्यक्रम में संवादात्मक सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें किसानों और उद्यमियों ने उत्पादन, मूल्य संवर्धन और सरकारी सहायता तंत्र पर विशेषज्ञों के साथ चर्चा की। “नित्या” फूड इंडस्ट्री के श्री राधाकृष्ण ने अपनी उद्यमशीलता की यात्रा साझा की और एक सफल काजू-आधारित उद्यम स्थापित करने में आईसीएआर-डीसीआर और सरकारी एजेंसियों से प्राप्त सहयोग को स्वीकार किया। किसानों ने फसल बीमा योजनाओं के अंतर्गत काजू को शामिल करने सहित क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे भी उठाए, जिससे उद्योग के लिए निरंतर नीतिगत समर्थन की आवश्यकता पर बल मिला। किसानों और कृषि सखियों के लिए काजू में कैनोपी प्रबंधन पर एक तकनीकी सत्र भी आयोजित किया गया।
स्थापना दिवस समारोह ने विज्ञान को आगे बढ़ाने, सतत काजू खेती को बढ़ावा देने और देशभर में काजू किसानों एवं उद्यमियों की आजीविका को सुदृढ़ करने के प्रति आईसीएआर-डीसीआर की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया। कार्यक्रम में कुल 106 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप-काजू अनुसंधान निदेशालय, पुत्तूर, कर्नाटक)







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