8-11 जून, 2026, पुणे
भाकृअनुप-राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केन्द्र, पुणे ने महाराष्ट्र राज्य अंगूर उत्पादक संघ (एमआरडीबीएस) और राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (एनएएएस) के पुणे चैप्टर के साथ साझेदारी में 8 से 11 जून, 2026 तक पुणे स्थित भाकृअनुप-एनआरसीजी परिसर में उन्नत अंगूर उत्पादन तकनीकों के माध्यम से अंगूर उत्पादन को बढ़ाने पर केन्द्रित एक क्षमता निर्माण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यह पहल संस्थान के सतत चल रहे "खेत बचाओ अभियान" का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य न्यूनतम रासायनिक आदानों के साथ उन्नत अंगूर उत्पादन तकनीकों के माध्यम से अंगूर उत्पादन को बढ़ाना है।
कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. कौशिक बनर्जी, निदेशक, भाकृअनुप-एनआरसीजी तथा श्री कैलासराव भोसले, अध्यक्ष, एमआरडीबीएस, ने किया।
श्री भोसले ने इस पहल को "प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण" कार्यक्रम बताते हुए प्रतिभागियों को 2026-2027 के फलन मौसम से पहले कम-से-कम 100 अतिरिक्त अंगूर उत्पादकों को सशक्त बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
डॉ. बनर्जी ने व्यावहारिक ज्ञान के प्रसार के एनएएएस के मिशन को दोहराते हुए खेती में शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला।

अन्य गणमान्य व्यक्तियों में एमआरडीबीएस के उपाध्यक्ष श्री मारुति चव्हाण, कोषाध्यक्ष श्री शिवाजीराव पवार तथा केन्द्रीय अनुसंधान समिति के अध्यक्ष श्री अभिषेक कंचन शामिल थे। सभी ने वैश्विक बाजारों में अंगूर उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सहयोग की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर बल दिया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने नई पीढ़ी के किसानों को भूमि तैयारी से लेकर अंगूर बागानों के संचालन के प्रभावी प्रबंधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उपकरणों के उपयोग तक, अंगूर की खेती में नवीनतम विकासों के बारे में सीखने के लिए जागरूक किया। जैव-गहन कीट एवं रोग प्रबंधन, उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग तथा सतत कृषि पद्धतियों पर विशेष जोर दिया गया।
एमआरडीबीएस के अधिकारियों ने आगे जानकारी दी कि आईसीएआर-एनआरसीजी के साथ उनके संयुक्त उपक्रम के माध्यम से पिछले तीन वर्षों में अब तक 900 से अधिक युवा किसानों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
कार्यक्रम का समापन प्रमाणपत्र वितरण समारोह तथा महिला किसानों पर केंद्रित भविष्य के प्रशिक्षण सत्रों के संबंध में चर्चाओं के साथ हुआ।
चार दिवसीय इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के प्रमुख अंगूर उत्पादक जिलों, जिनमें नासिक, सांगली, पुणे और सोलापुर शामिल हैं, के 40 युवा अंगूर उत्पादकों ने भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप-राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केन्द्र, पुणे)







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