6-8 सितंबर, 2026, पुणे
अनार पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन समारोह 7 सितंबर, 2026 को आयोजित किया गया। सम्मेलन के आयोजक, डॉ. राजीव ए. मराठे, निदेशक, भाकृअनुप–राष्ट्रीय अनार अनुसंधान केन्द्र तथा अध्यक्ष, एसएआरपी, ने पुष्पगुच्छ भेंट कर गणमान्य व्यक्तियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया।
अपने स्वागत संबोधन में डॉ. मराठे ने इस महत्वाकांक्षी मेगा सम्मेलन के आयोजन के उद्देश्यों को रेखांकित किया और इसमें मजबूत अंतरराष्ट्रीय भागीदारी पर प्रकाश डाला। डॉ. मराठे ने कहा कि यह पहली अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है, जो विशेष रूप से अनार की फसल को समर्पित है और अनार उत्पादन में ज्ञान के आदान-प्रदान तथा वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति को साझा करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। उन्होंने उभरती चुनौतियों का समाधान करने और अनार क्षेत्र के सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान संस्थानों, किसानों, उद्योग और नीति-निर्माताओं के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।

श्री दत्तात्रय भरणे, कृषि मंत्री, महाराष्ट्र, ने राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था में अनार की खेती के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार, कटाई उपरांत प्रबंधन को मजबूत करने, कोल्ड-चेन और भंडारण बुनियादी ढांचे के विकास, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने तथा वैश्विक बाजारों में भारतीय अनार की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए मजबूत निर्यात संपर्क स्थापित करने के महत्व पर जोर दिया।
समापन सत्र की अध्यक्षता डॉ. वी.बी. पटेल, सहायक महानिदेशक, भाकृअनुप, नई दिल्ली, ने की। विचार-विमर्श में रोग-मुक्त और गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री, क्षेत्र-विशिष्ट किस्मों और उत्पादन प्रौद्योगिकियों के महत्व तथा अनुसंधान और प्रौद्योगिकी प्रसार में किसानों की भागीदारी को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

डॉ. राजीव ए. मराठे ने प्रतिभागियों को आश्वस्त किया कि भाकृअनुप–राष्ट्रीय अनार अनुसंधान केन्द्र, अनार के मांग-आधारित अनुसंधान पर फोकस करेगा साथ ही सम्मेलन के विचार-विमर्श के दौरान चिन्हित चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए अन्य भाकृअनुप संस्थानों के सहयोग से अपने अनुसंधान कार्यक्रमों को पुनः उन्मुख करेगा। उन्होंने किसानों, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग और नीति-निर्माताओं के बीच संपर्क को एवं मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि प्रयोगशालाओं से किसानों तक और खेतों से वैश्विक बाजारों तक प्रौद्योगिकियों का प्रभावी हस्तांतरण सुनिश्चित किया जा सके।
सम्मेलन में इटली, दक्षिण अफ्रीका, अमेरिका, स्पेन, श्रीलंका, ओमान और नेपाल के 12 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के साथ-साथ भारत के प्रमुख अनार उत्पादक राज्यों, जिनमें महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और राजस्थान शामिल हैं, के 300 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय अनार अनुसंधान केन्द्र, सोलापुर)







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