1 जुलाई, 2026, हैदराबाद
भाकृअनुप-राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी (भाकृअनुप-एनएएआरएम), हैदराबाद, ने आज 26 राज्यों के 572 शिक्षार्थियों की भागीदारी के साथ दो माह के ऑनलाइन शैक्षिक प्रौद्योगिकी पर प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम (सीसीईटी-2026) का शुभारंभ किया।
अध्यक्षीय संबोधन देते हुए डॉ. रमन मीनाक्षी सुंदरम, निदेशक, भाकृअनुप-एनएएआरएम, ने शैक्षिक प्रौद्योगिकी को आधुनिक शिक्षा में एक परिवर्तनकारी शक्ति बताया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि शिक्षकों को ऐसे सुगमकर्ता (फैसिलिटेटर) और अधिगम डिज़ाइनर के रूप में विकसित होना चाहिए, जो लचीले, संवादात्मक और शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षण अनुभवों का निर्माण करने में सक्षम हों। प्रतिभागियों को नवाचारी डिजिटल शिक्षण पद्धतियों और उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने आग्रह किया कि वे इस कार्यक्रम को केवल एक प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षण और अधिगम में सुधार की दिशा में एक परिवर्तनकारी यात्रा के रूप में देखें।

प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम निदेशक एवं शिक्षा प्रणाली प्रबंधन प्रभाग के कार्यवाहक प्रमुख डॉ. वी.वी. सुमंथ कुमार ने ऑनलाइन क्षमता निर्माण में आईसीएआर-एनएएआरएम की अग्रणी भूमिका पर प्रकाश डाला और बताया कि अकादमी के एमओओसी पाठ्यक्रमों को अत्यधिक उत्साहजनक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि सीसीईटी का विकास शिक्षकों की डिजिटल शिक्षण दक्षताओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया गया है।
अपने संबोधन में संयुक्त निदेशक डॉ. गोपाल लाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा उच्च कृषि शिक्षा को सुदृढ़ करने में प्रौद्योगिकी-सक्षम शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया।
(स्रोत: भाकृअनुप-राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी, हैदराबाद)







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