7 मई, 2026, कोयंबटूर
भाकृअनुप–गन्ना प्रजनन संस्थान (एसबीआई), कोयंबटूर ने अनुसूचित जनजाति घटक विकास कार्य योजना (डीएपीएसटीसी) परियोजना के अंतर्गत अनामलाई टाइगर रिजर्व के तिरुप्पुर प्रभाग के सहयोग से पूचाकोट्टमपराई और करुमुट्टी के दूरस्थ आदिवासी बस्तियों में रहने वाले जनजातीय समुदायों के लिए ‘जनजातीय प्रशिक्षण अभियान’ का आयोजन किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. पी. गोविंदराज, निदेशक, भाकृअनुप-एसबीआई, ने कहा कि भारत सरकार के 40 से अधिक विभाग कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, रोजगार सृजन तथा कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में जनजातीय विकास पर केन्द्रित डीएपीएसटीसी पहलें संचालित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि भाकृअनुप-एसबीआई ने वर्ष 2021 में अनामलाई टाइगर रिजर्व में डीएपीएसटीसी परियोजना की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य आदिवासी समुदायों के लिए आवश्यकता-आधारित तथा समग्र विकासात्मक हस्तक्षेपों को बढ़ावा देना है।
डॉ. गोविंदराज ने बाल विवाह की रोकथाम के महत्व पर बल दिया तथा परियोजना के अंतर्गत निर्मित सामुदायिक परिसंपत्तियों, विशेष रूप से पावर टिलर, के प्रभावी उपयोग के माध्यम से कृषि उत्पादकता और आजीविका बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
अभियान के दौरान विशेषज्ञों ने कुपोषण के खिलाफ शपथ दिलाई और पाया कि आदिवासी समुदायों में सब्जियों का उपभोग अनुशंसित आहार स्तर से कम है। इस समस्या के समाधान के लिए भाकृअनुप-एसबीआई द्वारा घरेलू पोषण सुधार हेतु रसोई बागवानी के लिए सब्जी बीज तथा श्रीअन्न (मिलेट) के बीज वितरित किए जा रहे हैं, जिन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल और टिकाऊ रणनीति के रूप में अपनाया गया है।
डॉ. गोविंदराज ने सत्यमंगलम टाइगर रिजर्व के ‘मावनथम’ आदिवासी बस्ती में डीएपीएसटीसी हस्तक्षेपों की सफलताओं का उल्लेख किया, जहां सब्जी एवं मोटा अनाज उत्पादन तथा प्राथमिक प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के लिए पल्वराइजर अपनाने से उत्साहजनक परिणाम प्राप्त हुए। उन्होंने मुधुवर जनजातीय समुदायों को अपनी पारंपरिक कृषि ज्ञान और कौशल का उपयोग करते हुए मिलेट आधारित उद्यमिता के अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।

अभियान के दौरान अदरक की खेती, मशरूम उत्पादन तथा वैज्ञानिक मिलेट खेती पर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इस पहल के अंतर्गत आदिवासी किसानों को पावर टिलर, कृषि उपकरण, घरेलू उपयोग की सामग्री, किचन गार्डन किट, बाजरा एवं हरी खाद के बीज, सुपारी के पौधे तथा अन्य कृषि आदान उपलब्ध कराए गए, जिनका उद्देश्य टिकाऊ आजीविका और पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करना है।
(स्रोत: भाकृअनुप–गन्ना प्रजनन संस्थान, कोयंबटूर)







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