भाकृअनुप-क्रिडा, हैदराबाद में निकरा-टीडीसी हितधारकों की बैठक में स्थान-विशिष्ट जलवायु अनुकूलन कार्ययोजनाओं पर जोर

भाकृअनुप-क्रिडा, हैदराबाद में निकरा-टीडीसी हितधारकों की बैठक में स्थान-विशिष्ट जलवायु अनुकूलन कार्ययोजनाओं पर जोर

6–8 अक्टूबर, 2026, हैदराबाद

राष्ट्रीय जलवायु अनुकूल कृषि नवाचार कार्यक्रम–प्रौद्योगिकी प्रदर्शन घटक (एनआईसीआरए-टीडीसी) के अंतर्गत “स्थान-विशिष्ट कार्ययोजनाएं तैयार करने और उन्हें क्रियान्वित करने” विषय पर तीन दिवसीय हितधारक बैठक का उद्घाटन आज भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद में किया गया। इस बैठक का आयोजन भाकृअनुप-क्रिडा द्वारा 6 से 8 अक्टूबर, 2026 तक किया जा रहा है।

डॉ. मनमोहन सिंह चौहान, पूर्व कुलपति, जी.बी. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जीबीपीयूएटी), पंतनगर, उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि थे। डॉ. एन. राकेश कुमार, सहायक महानिदेशक (कृषि विज्ञान, कृषि वानिकी एवं जलवायु परिवर्तन), भाकृअनुप तथा डॉ. शैक एन. मीरा, निदेशक, भाकृअनुप-अटारी, हैदराबाद, सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। डॉ. राजबीर सिंह, उप महानिदेशक (कृषि विस्तार), भाकृअनुप तथा डॉ. रंजय सिंह, सहायक महानिदेशक (कृषि विस्तार), ने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में भाग लिया।

NICRA-TDC Stakeholders’ Meeting Focuses on Location-Specific Climate Resilience Action Plans at ICAR-CRIDA, Hyderabad

इस बैठक का उद्देश्य पिछले पांच वर्षों की उपलब्धियों और उनसे प्राप्त सीख की समीक्षा करना तथा अनुमोदित निकरा-टीडीसी कार्ययोजना को अगले चरण के लिए स्थान-विशिष्ट कार्ययोजनाओं में परिवर्तित करना है।

वर्चुअल माध्यम से जुड़े डॉ. राजबीर सिंह ने जमीनी स्तर पर निकरा-टीडीसी के क्रियान्वयन पर प्रकाश डाला और इसकी सफलता में कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) की भूमिका को स्वीकार किया। उन्होंने राज्य के विभागों के साथ समन्वय पर जोर दिया और कार्ययोजनाओं के समयबद्ध विकास एवं अद्यतन में सहयोग के लिए जिला स्तर पर फीडबैक तंत्र स्थापित करने का सुझाव दिया।

डॉ. एन. राकेश कुमार ने योजना निर्माण के लिए समय पर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने में निकरा-टीडीसी टीम के प्रयासों की सराहना की और खेतों में प्रदर्शित प्रमाणित प्रौद्योगिकियों के प्रभाव का आकलन करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

डॉ. शैक एन. मीरा ने केवीके और अटारी के माध्यम से क्रियान्वित निकरा-टीडीसी के जलवायु अनुकूलन क्षमता को मजबूत करने में योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने ब्लॉक स्तर पर आकस्मिक योजनाएं तैयार करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने पिछले 15 वर्षों में निकरा-टीडीसी के अंतर्गत किए गए कार्यों की सराहना की और प्रयोगशालाओं से किसानों के खेतों तक प्रौद्योगिकियों के प्रभावी हस्तांतरण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने व्यापक स्तर पर प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए उनके वैज्ञानिक सत्यापन के महत्व को भी रेखांकित किया।

डॉ. वी.के. सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-क्रिडा, ने गणमान्य व्यक्तियों और प्रतिनिधियों का स्वागत किया तथा बैठक के उद्देश्यों की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने निकरा-टीडीसी के महत्व पर प्रकाश डाला और पिछले 15 वर्षों में कृषि विज्ञान केंद्रों के योगदान को स्वीकार किया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भाकृअनुप-क्रिडा द्वारा तैयार की गई आकस्मिक योजनाएं कई राज्यों के लिए उपयोगी सिद्ध हुई हैं।

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उद्घाटन सत्र के बाद निकरा-टीडीसी की प्रगति की समीक्षा के लिए विभिन्न क्षेत्रों के अनुसार समानांतर समीक्षा सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों ने पिछले पांच वर्षों के अपने अनुभवों और उपलब्धियों को प्रस्तुत किया। विचार-विमर्श के दौरान प्रगति की समीक्षा, कमियों की पहचान, सफल अनुभवों को साझा करने और अगले चरण के लिए अनुमोदित कार्ययोजना को क्रियान्वित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

बैठक से प्राप्त सिफारिशें निकरा-टीडीसी के क्रियान्वयन का मार्गदर्शन करेंगी। इनमें स्थान-विशिष्ट कृषि प्रणाली संबंधी हस्तक्षेपों, संस्थागत समन्वय, डिजिटल निगरानी और ग्राम स्तर पर सतत जलवायु अनुकूलन क्षमता पर विशेष जोर दिया जाएगा।

बैठक में 100 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें अटारी और हैदराबाद स्थित आईसीएआर संस्थानों के निदेशक, नोडल वैज्ञानिक, क्षेत्रीय निगरानी समिति के सदस्य, आईसीएआर संस्थानों एवं कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिक तथा कार्यक्रम से जुड़े अन्य हितधारक शामिल थे।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)

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