4 मई, 2026, हैदराबाद
भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोन-X, हैदराबाद, के अंतर्गत 4 मई, 2026 को आठ जिलों में संतुलित उर्वरक उपयोग पर चलाए गए गहन अभियान में आठ कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) ने भाग लिया। इस अभियान ने विस्तार सेवाओं, प्रशिक्षण तथा डिजिटल प्रसार के प्रभावी समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। अभियान के अंतर्गत आयोजित 10 जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से 519 किसानों तक प्रत्यक्ष रूप से पहुंच बनाई गई, जबकि 6 प्रशिक्षण कार्यक्रमों से 284 किसानों को लाभ मिला। इसके अतिरिक्त, 99 प्रतिभागियों की सहभागिता वाले हितधारक संवाद भी आयोजित किया गया। विस्तार गतिविधियों में हरी खाद, जैव उर्वरकों तथा अन्य टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर आधारित 8 प्रदर्शन शामिल थे। साथ ही दीवार लेखन एवं विशेषज्ञ व्याख्यानों के माध्यम से भी किसानों को जागरूक किया गया। डिजिटल माध्यमों ने इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। व्हाट्सएप, फेसबुक और अन्य मीडिया प्लेटफॉर्मों के जरिए 4,28,585 किसानों तक संदेश पहुंचाया गया, जबकि प्रत्यक्ष संपर्क के माध्यम से 1,141 किसानों को जोड़ा गया। समग्र रूप से यह अभियान क्षमता निर्माण और जनसंचार के सफल एकीकरण का उदाहरण बना, जिसने क्षेत्र में संतुलित उर्वरक उपयोग संबंधी जागरूकता बढ़ाने तथा उसके अपनाने को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

इसी प्रकार, आईसीएआर-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोन-X, हैदराबाद, के अंतर्गत आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी संतुलित उर्वरक उपयोग पर व्यापक अभियान चलाया गया। इस अभियान में सभी 72 कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) को शामिल किया गया, जिसने विस्तार सेवाओं, क्षमता निर्माण और डिजिटल प्रसार के मजबूत समन्वय को प्रदर्शित किया। अभियान के दौरान कुल 38 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनसे 1,812 किसानों तक प्रत्यक्ष रूप से पहुंच बनाई गई। इसके अलावा, 13 प्रशिक्षण कार्यक्रमों से 590 किसानों को लाभान्वित किया गया।

इस अभियान में 183 प्रतिभागियों की सहभागिता वाले हितधारक संवाद तथा 150 किसानों को शामिल करते हुए एक किसान मेले का भी आयोजन किया गया, जिससे किसान–वैज्ञानिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाया गया। विस्तार गतिविधियों के अंतर्गत हरी खाद, जैव उर्वरकों और अन्य टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर आधारित 31 प्रदर्शन आयोजित किए गए। इन गतिविधियों को दीवार लेखन और विशेषज्ञ व्याख्यानों का भी सहयोग प्राप्त हुआ। डिजिटल प्रसार इस अभियान का प्रमुख आधार बना, जिसके माध्यम से व्हाट्सएप, फेसबुक और अन्य मीडिया प्लेटफॉर्मों द्वारा 4,88,462 किसानों तक पहुंच बनाई गई। इसके अतिरिक्त, प्रत्यक्ष संपर्क के जरिए 2,952 किसानों को भी जोड़ा गया। समग्र रूप से यह अभियान क्षमता निर्माण और जनसंचार के प्रभावी समन्वय का सफल उदाहरण साबित हुआ, जिसने पूरे जोन में संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उसके अपनाने को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोन-X, हैदराबाद)







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