भाकृअनुप–ऑर्किड्स के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान केन्द्र, पाक्योंग, सिक्किम में भारतीय ऑर्किड महोत्सव 2026 का कियै गया आयोजन

भाकृअनुप–ऑर्किड्स के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान केन्द्र, पाक्योंग, सिक्किम में भारतीय ऑर्किड महोत्सव 2026 का कियै गया आयोजन

7–10 मार्च 2026, सिक्किम

“सौंदर्य और समृद्धि के लिए ऑर्किड” थीम के अंतर्गत भारतीय ऑर्किड महोत्सव 2026 का आयोजन 7–10 मार्च, 2026 के दौरान भाकृअनुप-राष्ट्रीय ऑर्किड अनुसंधान केन्द्र, पाक्योंग, सिक्किम में किया गया।

महोत्सव का मुख्य आकर्षण ऑर्किड प्रदर्शनी-सह-प्रतियोगिता रहा, जिसमें देशभर के उत्पादकों, वाणिज्यिक नर्सरियों, संस्थानों तथा शौकिया प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस दौरान विभिन्न ऑर्किड प्रजातियों एवं संकर (हाइब्रिड) किस्मों का प्रदर्शन किया गया तथा विशेषज्ञों द्वारा उनका मूल्यांकन किया गया। प्रतियोगिता में ऑर्किड प्रजाति, सिम्बिडियम हाइब्रिड, ऑर्किड फोटोग्राफी तथा बोन्साई, सक्यूलेंट्स और कैक्टस जैसे सजावटी पौधों की प्रदर्शनी जैसी श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए गए।

उद्घाटन कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री राजू बसनेत, शिक्षा, खेल एवं युवा कार्य, विधि एवं संसदीय कार्य विभाग, सिक्किम सरकार के मंत्री ने की, जबकि डॉ. संजय कुमार, अध्यक्ष, कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड (एएसआरबी) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में श्री सुदेश कुमार सुब्बा, विधायक-सह-परामर्शदाता, पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन विभाग, सहित अनेक गणमान्य अतिथि, अधिकारी एवं प्रगतिशील किसान भी उपस्थित रहे।

Indian Orchid Festival 2026 Organised at ICAR–NRC for Orchids, Pakyong, Sikkim

अपने संबोधन में श्री राजू बासनेट ने आजीविका के अवसर सृजित करने में पुष्पोत्पादन (फ्लोरीकल्चर) के महत्व पर प्रकाश डाला तथा उत्पादकों के लिए बाजार संपर्क को सुदृढ़ करने पर बल दिया। डॉ. संजय कुमार ने ऑर्किड विकास एवं व्यावसायीकरण के सफल अंतरराष्ट्रीय मॉडलों को साझा किया, जिन्हें भारत में अपनाया जा सकता है, और ऑर्किड उद्योग को मजबूत करने हेतु वैज्ञानिक अनुसंधान को व्यावसायिक मॉडलों के साथ एकीकृत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। श्री सुदेश कुमार सुब्बा ने क्षेत्र की समृद्ध ऑर्किड विविधता को रेखांकित किया तथा युवाओं को पुष्पोत्पादन और पर्यटन में उद्यमिता के अवसरों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

महोत्सव के दूसरे दिन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें ऑर्किड की खेती, उद्यमिता, सरकारी सहायता योजनाओं तथा आधुनिक उत्पादन तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया गया। जैव संसाधन विकास केंद्र, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड तथा कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण सहित विभिन्न संस्थाओं के विशेषज्ञों और फ्लोरीकल्चर उद्योग के प्रतिनिधियों ने ऑर्किड की संभावनाओं, महिला जैव-उद्यमिता, सिम्बिडियम हाइब्रिड विकास, फेलेनोप्सिस की खेती तथा सटीक मृदा-रहित कृषि तकनीकों पर अपने विचार साझा किया।

तीसरे दिन शैक्षणिक–उद्योग–हितधारक सहयोग विषय पर एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. हिमांशु पाठक, महानिदेशक, अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान तथा पूर्व सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (भाकृअनुप), उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री जिग्मी दोरजी भूटिया, आयुक्त-सह-सचिव (कृषि एवं बागवानी), सिक्किम सरकार ने की। डॉ. एस. अंबालागन, सचिव, कृषि विभाग, सिक्किम सरकार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि डॉ. एस. पी. दास, निदेशक, भाकृअनुप–एनआरसीओ, सह-अध्यक्ष रहे। श्री टी.टी. भूटिया, प्रधान निदेशक-सह-सचिव (बागवानी), सिक्किम सरकार विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

Indian Orchid Festival 2026 Organised at ICAR–NRC for Orchids, Pakyong, Sikkim

अपने संबोधन में डॉ. हिमांशु पाठक ने ऑर्किड को केवल सजावटी पौधे से एक व्यवहार्य व्यवसायिक अवसर के रूप में विकसित होने की दिशा में हुए परिवर्तन को रेखांकित किया तथा फ्लोरीकल्चर क्षेत्र को आगे बढ़ाने में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका पर जोर दिया।

महोत्सव में अंतर-विद्यालय एवं अंतर-महाविद्यालय प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया, जिसमें 15 विद्यालयों और 5 महाविद्यालयों के 300 से अधिक छात्रों ने भाग लिया। इस पहल ने युवाओं के बीच ऑर्किड, पुष्पोत्पादन और जैव विविधता के प्रति जागरूकता को बढ़ावा दिया।

डॉ. पी.एस. दास के अनुसार, इस महोत्सव में 200 से अधिक प्रदर्शकों—जिनमें संस्थान, कंपनियां और नर्सरियां शामिल थीं—ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंतर्गत ऑर्किड प्रदर्शनी, प्रतियोगिता, कार्यशालाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम, खरीदार-विक्रेता बैठकें तथा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं।

आउटरीच पहल के अंतर्गत, आईसीएआर संस्थानों के उत्तर-पूर्वी पर्वतीय (एनईएच) घटक के तहत 570 से अधिक किसानों को पौध सामग्री वितरित की गई। उच्च गुणवत्ता वाली टिश्यू-कल्चर से तैयार सिम्बिडियम ऑर्किड की रोपण सामग्री भाकृअनुप–भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान, भाकृअनुप–केन्द्रीय धान अनुसंधान संस्थान, भाकृअनुप–भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान तथा भाकृअनुपृ–केन्द्रीय कपास अनुसंधान संस्थान द्वारा प्रदान की गई, जिससे क्षेत्र में ऑर्किड की खेती को बढ़ावा देने और फ्लोरीकल्चर आधारित आजीविका को सुदृढ़ करने में सहायता मिलेगी। इसके अतिरिक्त, भाकृअनुप–भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान द्वारा सब्जी बीज किट और फल फसलों की रोपण सामग्री भी वितरित की गई।

महोत्सव के दौरान भाकृअनुप-राष्ट्रीय ऑर्किड अनुसंधान केन्द्र द्वारा विकसित 13 नए ऑर्किड संकरों (हाइब्रिड) का औपचारिक विमोचन डॉ. संजय कुमार तथा डॉ. हिमाशु पाठक द्वारा किया गया। इसके साथ ही, विभिन्न ऑर्किड वंशों (जेनरा) पर स्थानीय भाषा में तैयार 8 तकनीकी पुस्तिकाओं का भी विमोचन किया गया, जिससे स्थानीय उत्पादकों के लिए वैज्ञानिक जानकारी की पहुँच को बढ़ाया जा सके। कार्यक्रम के दौरान वास्तविक ऑर्किड को समाहित करते हुए विकसित एक एपॉक्सी-कोटेड टेबलटॉप (मूल्य संवर्धित उत्पाद) का भी अनावरण किया गया।

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समापन समारोह में श्री पुरन गुरूंग, कृषि, बागवानी, पशुपालन एवं मत्स्य विभाग, सिक्किम सरकार के मंत्री मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने राज्य की अनुकूल जलवायु परिस्थितियों और जैविक खेती की स्थिति को रेखांकित करते हुए बताया कि ये कारक क्षेत्र में ऑर्किड खेती और फ्लोरीकल्चर के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं।

चार दिवसीय इस आयोजन ने वैज्ञानिकों, ऑर्किड उत्पादकों, किसानों, उद्यमियों, छात्रों, नीति-निर्माताओं तथा उद्योग प्रतिनिधियों को एक मंच पर एकत्र किया, जिससे ऑर्किड विविधता को बढ़ावा देने, अनुसंधान–उद्योग संबंधों को सुदृढ़ करने तथा फ्लोरीकल्चर क्षेत्र में व्यावसायिक संभावनाओं का अन्वेषण करने में मदद मिली।

(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय ऑर्किड अनुसंधान केन्द्र, पाक्योंग, सिक्किम)

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