भाकृअनुप-सिफे ने XIX कॉन्वोकेशन का किया आयोजन

भाकृअनुप-सिफे ने XIX कॉन्वोकेशन का किया आयोजन

21 फरवरी, 2026, मुंबई

भाकृअनुप-केन्द्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान ने आज अपना XIX कॉन्वोकेशन का आयोजन किया, जिसमें कुल 143 छात्रों को डिग्री दी गई, जिनमें 94 मास्टर्स और 49 पीएचडी शोधार्थी शामिल थे। डॉ. एन.पी. साहू, निदेशक तथा कुलपति, भाकृअनुप-सिफे, द्वारा ये डिग्री प्रदान की गई।

मुख्य अतिथि, डॉ. एम.एल. जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (भाकृअनुप), ने मेधावी छात्रों को गोल्ड मेडल दिए और कॉन्वोकेशन को संबोधित किए।

ICAR-CIFE Celebrates XIX Convocation

अपने संबोधन में, डॉ. जाट ने एक प्रगतिशील तथा तेज़ी से बढ़ते क्षेत्र को सपोर्ट करने में व्यावसायिक मात्स्यिकी शिक्षा की अहम भूमिका पर ज़ोर दिया, जो पूरे भारत में लगभग 3 करोड़ लोगों को रोजी-रोटी देता है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में, प्राकृतिक मत्स्य दोहन और मत्स्य पालन अब कुल मछली उत्पादन में लगभग बराबर का योगदान देते हैं, जो उच्च श्रेणी के मत्स्य पालन व्यवस्था की ओर एक बड़ा बदलाव दिखाता है जो पानी और ऊर्जा की बचत तथा पुनर्चक्रण, जेनेटिकली इम्प्रूव्ड स्ट्रेन्स का इस्तेमाल करने के साथ-साथ प्रभावी फीड एवं स्वास्थ्य प्रबंधन रणनीति को भी अपनाते हैं।

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह बदलता हुआ माहौल मत्स्य पालक व्यवसायी के लिए बड़े मौके देता है, जो उद्यमी के तौर पर उभरने के लिए अच्छी स्थिति में हैं और उन्हें देश के बढ़ते स्टार्टअप पारिस्थितिकी का फ़ायदा उठाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि भाकृअनुप-सिफे ने दूसरे भाकृअनुप  मात्स्यिकी संस्थान और कृषि विश्वविद्यालय के साथ मिलकर ऐसी उच्च श्रेणी की तकनीकी का विकास किया हैं जो औद्योगिक विकास को बढ़ावा दे सकती हैं। स्टूडेंट उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए भाकृअनुप-सिफे की कोशिशों की तारीफ करते हुए, उन्होंने भरोसा जताया कि ऐसी कोशिशें भारत को सेवा आधारित अर्थव्यवस्था से ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में बदलने में मदद करेगा और 2047 तक “विकसित भारत” बनाने के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को सपोर्ट करेगा।

ICAR-CIFE Celebrates XIX Convocation

डॉ. जॉयकृष्णा जेना, उप-महानिदेशक (मात्स्यिकी  विज्ञान) तथा भाकृअनुप के शिक्षा विभाग के शिक्षा के अतिरिक्त प्रभार, सम्मानित अतिथि के तौर पर कार्यक्रम में शामिल हुए।

भारत का मात्स्यिकी क्षेत्र लगातार मजबूत ग्रोथ दिखा रहा है। 2025 में, देश ने 197.75 लाख टन का रिकॉर्ड मछली उत्पादन हासिल किया, जिससे भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक बन गया, जिसका दुनिया के उत्पादन में 8% हिस्सा था। मात्स्यिकी तथा जलजीव पालन देश की जीडीपी में लगभग 1.24% का योगदान देते हैं। 2023-24 के दौरान, मात्स्यिकी एक्सपोर्ट 16.98 लाख टन तक पहुँच गया, जिसकी कीमत ₹62,408 करोड़ थी। 2014-15 से, इस सेक्टर ने औसतन 11% से ज्यादा सालाना विकास दर दर्ज की है।

2020 से 2025 तक प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) को लागू करने के बाद, भारत सरकार ने प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) शुरू की है। इसके अलावा, संस्थात्मक उपलब्धि को और बेहतर बनाने तथा इसकी पहुँच को बेहतर बनाने हतु मछुआरों और मछली पालने वालों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) की सुविधा दी गई है।

ICAR-CIFE Celebrates XIX Convocation

आगे देखते हुए, भारत-विस्तार, एक प्रस्तावित बहुभाषी कृत्रिम मेधा (AI)-आधारित उपकरण है जिसे भाकृअनुप के नॉलेज सिस्टम के साथ एग्रीस्टैक पोर्टल को जोड़ने के लिए डिज़ाइन किया गया है, इससे कृषि एवं मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए डिजिटल सहायता को और अधिक मजबूत करने की उम्मीद है। भारत को उच्च-गुणवत्ता वाली मछली उत्पादन में दुनिया का प्रमुख उत्पादक तथा उपभोक्ता बनाने की इस बदलाव हेतु वृहद स्तर पर मात्स्यिकी शिक्षा तथा कुशल उद्यमी की भूमिका अहम होगी।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान, मुंबई)

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