24 अगस्त, 2026, चेन्नई
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री राम नाथ ठाकुर ने आज वैज्ञानिकों और संस्थान के अधिकारियों के साथ आयोजित एक बैठक के दौरान भाकृअनुप–केन्द्रीय खारे पानी की जलीय कृषि संस्थान (भाकृअनुप–सीबा), चेन्नई की अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों की समीक्षा की।
समीक्षा के दौरान मंत्री ने देश में जलवायु-अनुकूल, टिकाऊ और लाभदायक खारे पानी की जलीय कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संस्थान की प्रमुख अनुसंधान एवं विकास पहलों का आकलन किया। भारत की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के लिए मत्स्य पालन और जलीय कृषि के बढ़ते महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने मत्स्य उत्पादन और आजीविका में इस क्षेत्र के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से कृषि और मत्स्य पालन के लिए बजटीय सहायता में लगातार वृद्धि ने इस क्षेत्र के विकास और मत्स्य उत्पादन में वृद्धि में योगदान दिया है।
मंत्री ने कहा कि मत्स्य पालन और जलीय कृषि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने में योगदान देने वाले प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं। देश ने 4 करोड़ मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने वैज्ञानिक समुदाय से इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नवोन्मेषी, किसान-केन्द्रित प्रौद्योगिकि एवं समाधानों को विकसित करने का आह्वान किया।

श्री ठाकुर ने इस क्षेत्र में भाकृअनुप-सीबा के अग्रणी योगदान की सराहना की, विशेष रूप से सुपर-इंटेंसिव प्रिसीजन कम नेचुरल श्रिम्प फार्मिंग (एसआईपीएनएसएफ) प्रौद्योगिकी, स्वदेशी झींगा प्रजाति Penaeus indicus के उन्नत ब्रूडस्टॉक विकास तथा नवीन फीड प्रौद्योगिकियों के लिए, जिनमें फिशमील-मुक्त झींगा आहार, ब्लू स्विमर क्रैब आहार और झींगा लार्वा आहार के साथ-साथ कई मूल्यवर्धित तकनीकी उत्पाद शामिल हैं। उन्होंने जिम्मेदार जलीय कृषि योजना उपकरणों, डिजिटल ज्ञान हस्तांतरण तंत्रों और झींगा फसल बीमा उत्पादों के विकास के लिए संस्थान की पहलों की भी सराहना की।
मंत्री ने कहा कि इन नवाचारों को जलीय कृषि उद्योग से उत्साहजनक स्वीकृति मिली है और ये ‘प्रति बूंद अधिक फसल’, ‘किसानों की आय दोगुनी करना’, ‘चक्रीय अर्थव्यवस्था’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी व्यापक राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को दर्शाते हैं।
वैज्ञानिकों के साथ बातचीत करते हुए श्री ठाकुर ने मांग-आधारित और क्षेत्र-केन्द्रित अनुसंधान करने के उनके प्रयासों की सराहना की, जो विकसित कृषि संकल्प अभियान और खेत बचाओ अभियान जैसे राष्ट्रीय प्रमुख कार्यक्रमों से प्राप्त जानकारी पर आधारित हैं। उन्होंने वैज्ञानिकों से किसानों को जलवायु संबंधी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने में सहायता करने के लिए समय पर परामर्श और अनुकूलनशील प्रौद्योगिकियां विकसित करने का आग्रह किया, जिसमें खाद्य उत्पादन प्रणालियों पर अल नीनो जैसी घटनाओं के संभावित प्रभाव भी शामिल हैं।
प्रौद्योगिकी के व्यापक प्रसार के महत्व पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि भाकृअनुप-सीबा द्वारा विकसित नवाचार देशभर के जलीय कृषि किसानों तक पहुंचने चाहिए, जिसमें छोटे, सीमांत और आर्थिक रूप से कमजोर किसानों, विशेष रूप से बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के किसानों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। उन्होंने संस्थान को मछली किसानों की आजीविका और कल्याण में सुधार तथा मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए अपने प्रयास जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया।

डॉ. एम. कैलासम, निदेशक, भाकृअनुप-सीबा, ने संस्थान के दृष्टिकोण, प्रमुख विषयगत अनुसंधान क्षेत्रों और हाल की उपलब्धियों, जिसमें तकनीकी नवाचार और सामाजिक प्रभाव के लिए की गई पहल शामिल हैं, की प्रस्तुति दी।
बैठक के दौरान बताया गया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत वित्तीय सहायता से भाकृअनुप-सीबा में भारतीय सफेद झींगा (Penaeus indicus) के लिए एक न्यूक्लियस ब्रीडिंग सुविधा स्थापित की गई है। इस सुविधा से व्यवस्थित आनुवंशिक सुधार और टिकाऊ झींगा जलीय कृषि के लिए उन्नत ब्रूडस्टॉक के विकास की दिशा में संस्थान के प्रयासों को मजबूत करने की उम्मीद है।
समीक्षा बैठक ने प्रौद्योगिकी-आधारित, जलवायु-अनुकूल और टिकाऊ जलीय कृषि के प्रति भाकृअनुप-सीबा की निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित किया, साथ ही राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा, रोजगार सृजन और समावेशी ग्रामीण विकास में इस क्षेत्र के योगदान को मजबूत करने पर जोर दिया।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय खारे पानी की जलीय कृषि संस्थान, चेन्नई)







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