1. मूलभूत एवं रणनीतिक अनुसंधान तथा शिक्षा
• पर्यावरण के साथ सामंजस्य रखते हुए सतत कृषि उत्पादकता के लिए फसल सुधार में मूलभूत एवं रणनीतिक अनुसंधान करना।
• उत्पादन वृद्धि, संसाधन उपयोग दक्षता, जैविक एवं अजैविक तनावों के प्रति प्रतिरोध, कटाई उपरांत प्रबंधन तथा पर्यावरणीय स्थिरता हेतु जलवायु-सहिष्णु किस्में/संकर एवं तकनीकों का विकास करना।
• शैक्षणिक उत्कृष्टता, मानव संसाधन विकास तथा समग्र कृषि विकास के लिए गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को बढ़ावा देना तथा शिक्षा कार्यक्रमों को भविष्य की आवश्यकताओं एवं अवसरों के अनुरूप बनाना।
• ग्रामीण उद्यमिता एवं कृषि के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देकर कृषि को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाना तथा देश में कृषि व्यवसाय को प्रोत्साहित करना।
• नई अवधारणाओं एवं दृष्टिकोणों के विकास द्वारा कृषि अनुसंधान, विस्तार, तकनीक मूल्यांकन एवं हस्तांतरण में राष्ट्रीय नेतृत्व प्रदान करना तथा कृषि प्रौद्योगिकियों की गुणवत्ता एवं मानकों हेतु राष्ट्रीय संदर्भ के केन्द्र के रूप में कार्य करना।
• सूचना प्रणालियों का विकास करना, सूचनाओं का मूल्य संवर्धन करना, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचना साझा करना तथा राष्ट्रीय पुस्तकालय एवं डाटाबेस के रूप में कार्य करना।
2. पादप आनुवंशिक संसाधन प्रबंधन, बीज एवं पर्वतीय कृषि
• प्राथमिकता वाली फसलों, सूक्ष्मजीवों, कीट प्रजातियों तथा गुण-विशिष्ट जर्मप्लाज्म का अन्वेषण एवं संग्रह।
• जर्मप्लाज्म का लक्षण वर्णन, संरक्षण, मूल्यांकन, आदान-प्रदान एवं संगरोध।
• आनुवंशिक संसाधन प्रबंधन हेतु जीनोमिक संसाधनों का विकास।
• खाद्य, चारा, रेशा एवं औद्योगिक उपयोग हेतु नए पादप संसाधनों का अन्वेषण एवं प्रबंधन।
• आनुवंशिक संसाधन प्रबंधन हेतु मानव संसाधन विकास।
• खेत स्तर पर संरक्षण पद्धतियों का आनुवंशिक विविधता पर प्रभाव का आकलन।
• महत्वपूर्ण पर्वतीय फसलों पर अनुसंधान।
• बीज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में मूलभूत, रणनीतिक एवं भावी अनुसंधान।
• बीज उत्पादन एवं बीज प्रौद्योगिकी अनुसंधान का समन्वय।
• बीज उत्पादन, परीक्षण, गुणवत्ता आश्वासन, प्रमाणीकरण एवं नीतिगत विषयों में क्षमता निर्माण।
3. खाद्य एवं चारा फसलों का आनुवंशिक सुधार
• धान, गेहूँ, जौ, मक्का, मोटे अनाज एवं चारा फसलों की उत्पादकता एवं गुणवत्ता सुधार हेतु मूलभूत, रणनीतिक एवं अनुकूलन अनुसंधान।
• धान, गेहूँ, जौ, मक्का, मोटे अनाज एवं चारा फसलों की किस्मों/संकरों का विकास एवं पहचान।
• मूल्य संवर्धन हेतु कटाई उपरांत प्रौद्योगिकियों का विकास।
• बीज श्रृंखला को मजबूत करने हेतु उन्नत किस्मों के ब्रीडर बीज का उत्पादन।
• नई तकनीकों का विकास एवं परीक्षण।
• उन्नत तकनीकों का प्रसार एवं क्षमता निर्माण।
4. दलहन एवं तिलहन फसल सुधार
• दलहन एवं तिलहन फसलों की उत्पादकता एवं गुणवत्ता सुधार हेतु मूलभूत एवं रणनीतिक अनुसंधान।
• अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजनाओं के माध्यम से राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर अनुप्रयुक्त अनुसंधान की योजना, समन्वय एवं निगरानी कर स्थान-विशिष्ट किस्मों एवं तकनीकों का विकास।
• उन्नत तकनीक एवं दलहन उत्पादन वृद्धि हेतु सूचना, ज्ञान एवं आनुवंशिक सामग्री तक समान पहुंच उपलब्ध कराना।
• अनुसंधान एवं विकास रणनीति हेतु नीतिगत ढाँचा तैयार करने के लिए दलहन एवं तिलहन संबंधी सूचना प्रबंधन।
• तकनीक प्रसार एवं क्षमता निर्माण।
5. आनुवंशिक लाभ हेतु वाणिज्यिक फसलों का सुधार
• गन्ना, कपास, जूट एवं संबद्ध रेशा फसलें तथा तंबाकू जैसी वाणिज्यिक फसलों के आनुवंशिक संसाधनों का संग्रह, संरक्षण, मूल्यांकन, दस्तावेजीकरण एवं संधारण।
• घरेलू एवं निर्यात उपयोग हेतु गन्ना उत्पादन एवं संरक्षण, कपास रेशा गुणवत्ता एवं उप-उत्पाद, जूट एवं संबद्ध रेशा फसलें तथा तंबाकू पर मूलभूत, रणनीतिक एवं अनुकूलन अनुसंधान।
• गन्ना, कपास, जूट एवं संबद्ध रेशा फसलें तथा तंबाकू में उन्नत किस्मों एवं तकनीकों के विकास हेतु राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर अनुप्रयुक्त अनुसंधान का समन्वय एवं निगरानी।
• तकनीकों का प्रसार एवं क्षमता निर्माण।
6. कीट एवं सूक्ष्मजीव संसाधन, पादप संरक्षण एवं परागणकर्ता अनुसंधान
• सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) आधारित निगरानी, पर्यवेक्षण एवं प्रबंधन—जिसमें कीट, माइट्स, खरपतवार, उच्च जीव तथा पौध रोगजनकों से होने वाले रोग शामिल हैं।
• फसलों के लिए जैव-गहन एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) तकनीकों का अनुसंधान, विकास एवं प्रसार तथा वस्तु-आधारित फसल अनुसंधान संस्थानों, AICRP/AINP से समन्वय।
• कृषि में जैविक तनावों पर मूलभूत, रणनीतिक एवं अनुकूलन अनुसंधान को बढ़ावा देना तथा शैक्षणिक उत्कृष्टता हेतु गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन तैयार करना, साथ ही तकनीक प्रबंधन एवं नीति समर्थन हेतु विभिन्न हितधारकों से समन्वय।
• प्रमुख कशेरुकी कीटों (कृंतक, पक्षी एवं अन्य उच्च कशेरुकी) की जैव-पारिस्थितिकी एवं प्रबंधन।
• व्यवहार संशोधन एवं स्मार्ट डिलीवरी प्रणालियों के माध्यम से गैर-आक्रामक एवं पर्यावरण-अनुकूल फसल संरक्षण उपायों का उपयोग।
• बेहतर स्वच्छता, रक्षा, परागण एवं उत्पादन दक्षता हेतु मधुमक्खियों के बड़े पैमाने पर रानी पालन एवं प्रजनन द्वारा न्यूक्लियस स्टॉक उत्पादन।
• परागणकर्ता विविधता, जैव-भूगोल, घोंसला आवश्यकताओं आदि का डिजिटल डाटाबेस स्थापित करना।
• “परागणकर्ता-अनुकूल” सर्वोत्तम प्रबंधन पद्धतियों का विकास; फसल प्रबंधन, उत्पादन वृद्धि, उद्यमिता विकास एवं ग्रामीण रोजगार सृजन हेतु परागणकर्ताओं एवं मधुमक्खियों का समावेशन।
• संरक्षित खेती के अंतर्गत फसल उत्पादन हेतु भौंरा पालन (Bombiculture) एवं बिना डंक वाली मधुमक्खी पालन (Melliponiculture) का अनुसंधान एवं प्रसार।







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