23 फरवरी, 2026, पुणे
भाकृअनुप-राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान संस्थान, पुणे, ने राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (एनएएएस) के पुणे चैप्टर और अंगूर उत्पादन एवं मद्य-विज्ञान के उन्नयन के लिए सोसायटी (एसएवीई) के साथ मिलकर आज “बूंदों से सुरक्षा तक: बागवानी फसलों में जैविक तनाव को समाधान करने के लिए स्प्रे विज्ञान” नाम से एक वर्कशॉप का आयोजन किया।
पुणे क्षेत्र के डॉ. योगेंद्र नेरकर, सबसे वरिष्ठ फेलो, एनएएएस, इस मौके पर मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहे, जबकि डॉ. के. सैमी रेड्डी, एफएनएएएस और निदेशक, भाकृअनुप-राष्ट्रीय अजैविक तनाव प्रबंधन संस्थान, बारामती, सम्मानित अतिथि के तौर पर शामिल हुआ।

कार्यशाला में दो पैनल चर्चा हुआ: “प्रभाव से आत्मसात होने तक: पत्तियों की सतह पर बूंदे” और ‘बागों में बेहतर छिड़काव: समस्याएं एवं समाधान।” इस प्रोग्राम को अनोखा और देश में अपनी तरह का पहला प्रोग्राम बताते हुए, डॉ. नेरकर ने विशेषज्ञों की बातचीत तथा भाकृअनुप के वैज्ञानिक, बड़े स्प्रेयर तथा नोजल बनाने वाली कंपनियों के अनुसंधान एवं विकास अधिकारियों और कृषि रसायन उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ उनकी गहरी बातचीत की तारीफ की।
जादवपुर विश्वविद्यालय के शक्ति अभियांत्रिकी विभाग, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास, तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गांधीनगर, जैसे बड़े संस्थान के विशेषज्ञ ने स्प्रे क्रियाविधि, बूंदों के प्रतिक्रिया और तकनकी दक्षता पर अपनी राय शेयर की।
डॉ. कौशिक बनर्जी, निदेशक, भाकृअनुप-एनआरसीजी, ने विकसित कृषि संकल्प अभियान से सामने आए रिसर्च लायक मुद्दों पर रोशनी डाली और वर्कशॉप को अंतर-विषयक अनुसंधान तथा सार्वजनिक–निजी साझेदारी के ज़रिए किसानों के लिए पूरी तरह से पेस्ट और बीमारी प्रबंधन रणनीति बनाने की दिशा में एक जरूरी कदम बताया।
कार्यक्रम के दौरान, ‘अंगुर उत्पादक संकल्प – 2026’ नाम का एक बहुभाषीय ई-पब्लिकेशन एवं भाकृअनुप-एनआरसीजी की कोविड के बाद की उपलब्धियों को दिखाने वाली एक डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म रिलीज़ की गई।

कार्यक्रम में प्रतिभागियों को सरफेस विज्ञान की आधारभूत बातें, पत्तियों की सतह पर स्प्रे की बूंदों के स्थैतिक और परिवर्तनशील स्थिति के मिलन, और अलग-अलग फसल कैनोपी स्थिति के लिए सही स्प्रेयर और नोजल चुनने के मानक के बारे में पूरी जानकारी दी गई। बातचीत में एक बड़े अंतर-विषयक प्रोजेक्ट की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया गया, जिसका मकसद बेहतर कैनोपी कवरेज और पौधों की सुरक्षा के तरीकों की बेहतर जैव-प्रभावशीलता हासिल करना है।
इस कार्यक्रम में वैज्ञानिक, उद्योग से जुड़े व्यवसायी तथा प्रगतिशील किसानों समेत अलग-अलग हितधारक संस्थान के कुल 110 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 75 पुरुष एवं 35 महिलाएं उपस्थित रहीं।
(स्रोत: भाकृअनुप-राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान संस्थान, पुणे)







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