बढ़ी हुई पशुधन के लिए चारा उत्पादन संसाधनों के रणनीतिक मूल्यांकन पर भाकृअनुप द्वारा कार्यशाला का आयोजन

बढ़ी हुई पशुधन के लिए चारा उत्पादन संसाधनों के रणनीतिक मूल्यांकन पर भाकृअनुप द्वारा कार्यशाला का आयोजन

दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए मशीनीकृत चारा समाधान एवं पशुधन विविधीकरण महत्वपूर्ण: डॉ. एम.एल. जाट

30 जनवरी, 2026, नई दिल्ली

बढ़ी हुई पशुधन उत्पादन के लिए चारा संसाधनों के रणनीतिक मूल्यांकन पर भाकृअनुप द्वारा कार्यशाला का आयोजन आज नई दिल्ली में किया गया। इस कार्यक्रम में डॉ. एम.एल. जाट, सचिव (डेयर) तथा महानिदेशक (भाकृअनुप) उपस्थित थे, जिन्होंने भारत के पशुधन क्षेत्र के सामने आने वाली महत्वपूर्ण चुनौतियों, विशेष रूप से हरे चारे की घटती और इसकी मौसमी उपलब्धता पर प्रकाश डाला।

ICAR Workshop on Strategic Assessment of Feed Resources for Increased Livestock Production Organised

डॉ. जाट ने इस बात पर जोर दिया कि हरे चारे की कम और उतार-चढ़ाव वाली आपूर्ति दूध उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है, जो व्यापक एवं दूरदर्शी हस्तक्षेपों की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करता है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि चारा और चारे की प्रणालियों में मशीनीकरण, बेहतर संसाधन योजना के साथ, पशुधन पोषण में लगातार उपलब्धता तथा दक्षता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

उन्होंने कहा, "पशुधन-आधारित विविधीकरण को मजबूत करने से उत्पादकता बढ़ाने और यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जाएगी कि पशुधन क्षेत्र विकसित भारत के दृष्टिकोण में एक प्रभावशाली योगदान दे।"

डॉ. डी.के. यादव, उप-महानिदेशक, (फसल विज्ञान) भाकृअनुप, ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सभी पशुपालन विभागों को शामिल करते हुए एक समन्वित राष्ट्रीय प्रयास वर्तमान पशुधन जनगणना के साथ चारा एवं चारे की उपलब्धता को संरेखित करने और स्थायी पशुधन उत्पादकता को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है।

ICAR Workshop on Strategic Assessment of Feed Resources for Increased Livestock Production Organised

डॉ. राघवेंद्र भट्टा, उप-महानिदेशक (पशु विज्ञान), भाकृअनुप, ने पशुधन के लिए चारा और चारे के उत्पादन में प्रमुख चुनौतियों पर प्रकाश डाला तथा उन पर काबू पाने के लिए संभावित रणनीतियों पर चर्चा की।

इस कार्यशाला में विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं एवं नीति निर्माताओं को चारा संसाधनों को अनुकूलित करने, चारा प्रबंधन में सुधार करने और राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के अनुरूप स्थायी पशुधन उत्पादन प्रणालियों को बढ़ावा देने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श करने के लिए एक साथ लाया गया।

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