1 अगस्त, 2026, हैदराबाद
भाकृअनुप–भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप–आईआईओआर), राजेंद्रनगर, हैदराबाद ने भाकृअनुप के तत्वावधान में 1 अगस्त, 2026 को अपना स्वर्ण जयंती (50वां) स्थापना दिवस मनाया। यह कार्यक्रम डॉ. आर.के. माथुर, निदेशक, भाकृअनुप-आईआईओआर, की अध्यक्षता में आयोजित किया गया, जिसने तिलहन अनुसंधान और नवाचार में संस्थान की पाँच दशकों की उत्कृष्ट उपलब्धियों को चिह्नित किया।
डॉ. रमन मीनाक्षी सुंदरम, निदेशक, भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी (नार्म), हैदराबाद, ने कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में भाग लिया, जबकि डॉ. एस.के. झा, सहायक महानिदेशक (तिलहन एवं दलहन), भाकृअनुप, नई दिल्ली, सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इस समारोह में भाकृअनुप-आईआईओआर के कई पूर्व निदेशक, राष्ट्रीय तिलहन अनुसंधान संस्थानों के निदेशक तथा देशभर के विभिन्न अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (AICRP) केंद्रों और अनुसंधान संस्थानों से जुड़े तिलहन वैज्ञानिकों की विशिष्ट उपस्थिति रही।

अपने संबोधन में डॉ. एस.के. झा ने भाकृअनुप-आईआईओआर की उल्लेखनीय अनुसंधान उपलब्धियों की सराहना की तथा देश में तिलहन अनुसंधान के नोडल संस्थान के रूप में इसकी निरंतर सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएँ दीं।
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. आर.के. माथुर ने पिछले पाँच दशकों में संस्थान की महत्वपूर्ण उपलब्धियों, मील के पत्थरों और योगदानों पर प्रकाश डाला। उन्होंने भाकृअनुप-आईआईओआर द्वारा विकसित और जारी की गई किस्मों एवं संकरों के साथ-साथ कई नवोन्मेषी प्रौद्योगिकियों, जिनमें बायोपॉलिमर आधारित मल्टीलेयर बीज कोटिंग तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित परामर्श प्रणाली शामिल हैं, को प्रदर्शित किया। उन्होंने सतत तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अत्याधुनिक अनुसंधान के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
स्थापना दिवस व्याख्यान भाकृअनुप–भारतीय ताड़ तेल अनुसंधान संस्थान, पेडावेगी, आंध्र प्रदेश के निदेशक डॉ. के. सुरेश द्वारा “जीआईएस-आधारित बहु-मापदंड ओवरले विश्लेषण का उपयोग कर फसलों की उपयुक्तता का आकलन” विषय पर दिया गया। उन्होंने तिलहन खेती के विस्तार और प्रोत्साहन हेतु उपयुक्त क्षेत्रों की पहचान में भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) आधारित प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर प्रकाश डाला तथा कृषि नियोजन और निर्णय-निर्धारण में उन्नत स्थानिक उपकरणों की भूमिका को रेखांकित किया।

इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. रमन मीनाक्षी सुंदरम ने आईसीएआर-आईआईओआर को उत्कृष्टता के 50 वर्ष पूरे करने पर बधाई दी और तिलहन अनुसंधान एवं विकास के लिए समर्पित देश के प्रमुख संस्थानों में से एक के रूप में उभरने की इसकी उल्लेखनीय यात्रा की सराहना की।
स्थापना दिवस समारोह के अंतर्गत दो शोध प्रकाशनों का विमोचन किया गया, जिसके बाद संस्थान के उत्कृष्ट वैज्ञानिक, तकनीकी और प्रशासनिक कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। अरंडी, कुसुम (सैफ्लॉवर) और सूरजमुखी जैसी तिलहन फसलों को अपनाने और बढ़ावा देने में सराहनीय योगदान देने वाले लगभग 20 किसानों को सम्मानित किया गया तथा नवीनतम संकरों और किस्मों के बीज वितरित किए गए। बीज उत्पादन, इन्क्यूबेशन तथा मूल्य संवर्धन गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान भी किया गया।
इसके अतिरिक्त, “सतत तिलहन फसल सुधार हेतु आनुवंशिकी एवं जीनोमिक्स में प्रगति” विषय पर एक राष्ट्रीय पैनल चर्चा का भी आयोजन किया गया।
(स्रोत: भाकृअनुप–भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान, राजेंद्रनगर, हैदराबाद)







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