भाकृअनुप-आईएआरआई, नई दिल्ली ने आधुनिक कीटविज्ञान अनुसंधान में जैवसुरक्षा और जैवनीति पर कार्यशाला का किया आयोजन

भाकृअनुप-आईएआरआई, नई दिल्ली ने आधुनिक कीटविज्ञान अनुसंधान में जैवसुरक्षा और जैवनीति पर कार्यशाला का किया आयोजन

12 अगस्त, 2026, नई दिल्ली

“आधुनिक कीटविज्ञान अनुसंधान में उत्कृष्टता के लिए जैवसुरक्षा और जैवनीति” विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन आज भाकृअनुप–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-आईएआरआई), नई दिल्ली के एनआरएल सभागार में किया गया। इस कार्यशाला का आयोजन भाकृअनुप=-आईएआरआई के कीटविज्ञान प्रभाग द्वारा समकालीन कीटविज्ञान अनुसंधान में जैवसुरक्षा, जैव सुरक्षा (बायोसिक्योरिटी) और नैतिक प्रथाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा क्षमता सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव, निदेशक, भाकृअनुप-आईएआरआई, ने किया। इस अवसर पर भाकृअनुप-आईएआरआई के डॉ. सी. विश्वनाथन, संयुक्त निदेशक (अनुसंधान), तथा डॉ. अनुपमा सिंह, अधिष्ठाता एवं संयुक्त निदेशक (शिक्षा), सहित प्रतिष्ठित वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, पाठ्यक्रम निदेशक, शोधार्थी और प्रतिभागी उपस्थित रहे।

ICAR-IARI, New Delhi Organizes Workshop on Biosafety and Bioethics in Modern Entomological Research

अपने उद्घाटन संबोधन में डॉ. श्रीनिवास राव ने आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान में संलग्न विद्यार्थियों और युवा शोधकर्ताओं के लिए जैवसुरक्षा और जैवनीति के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रोत्साहित किया कि वे कार्यशाला के दौरान प्राप्त ज्ञान को अपने-अपने संस्थानों और महाविद्यालयों में व्याख्यानों के माध्यम से प्रसारित करें, जिससे उत्तरदायी जैवसुरक्षा और जैवनीतिक प्रथाओं के प्रति व्यापक जागरूकता को बढ़ावा मिल सके।

इस कार्यशाला का उद्देश्य तीव्र गति से विकसित हो रहे कीटविज्ञान के क्षेत्र में जैवसुरक्षा, जैव सुरक्षा, जैवनीति, प्रयोगशाला सुरक्षा, जोखिम मूल्यांकन तथा उत्तरदायी अनुसंधान आचरण के प्रति जागरूकता और क्षमता निर्माण करना है। आधुनिक अनुसंधान में आणविक जीवविज्ञान, आरएनए इंटरफेरेंस (RNA Interference), साआरआईएसपीआर-आधारित जीनोम संपादन, कीट ट्रांसजेनेसिस, सिंथेटिक बायोलॉजी, सूक्ष्मजीवी जैव-नियंत्रण तथा कीट कोशिका संवर्धन जैसी उन्नत तकनीकों के बढ़ते उपयोग को देखते हुए यह कार्यक्रम सुरक्षित, नैतिक और पर्यावरणीय रूप से उत्तरदायी तरीके से वैज्ञानिक नवाचार करने के महत्व को रेखांकित करता है।

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तीन दिवसीय कार्यक्रम में विशेषज्ञ व्याख्यान, व्यावहारिक प्रदर्शन तथा प्रयोगशाला-उन्मुख गतिविधियाँ शामिल हैं, जिनमें जैवसुरक्षा विनियम; बीएसएल/आईबीएसएल सुविधाएँ; जैविक सामग्रियों का सुरक्षित प्रबंधन; आनुवंशिक रूप से परिवर्तित जीव; कीट रोगजनक एवं सूक्ष्मजीव; खतरनाक रसायन; प्रयोगशाला अपशिष्ट प्रबंधन; आपातकालीन तैयारी; पर्यावरणीय सुरक्षा; अनुसंधान सत्यनिष्ठा; प्रकाशन नैतिकता; तथा उत्तरदायी अनुसंधान प्रथाएँ शामिल हैं।

कार्यशाला में कुल 31 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं, जिनमें प्रारंभिक-करियर वैज्ञानिक, शोधार्थी तथा तकनीकी एवं अनुसंधान कर्मचारी शामिल हैं।

(स्रोत: भाकृअनुप–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली)

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