सरकारी कर्मचारियों में सेवा भावना, प्रोफेशनल नैतिकता एवं प्रतिबद्धता को मजबूत करने के उद्देश्य से भाकृअनुप–पूर्वी क्षेत्र के लिए अनुसंधान परिसर, पर्वतीय एवं पठारी क्षेत्र के लिए कृषि प्रणाली अनुसंधान केन्द्र (एफएसआरसी-एचपीआर), रांची, में राष्ट्रीय कर्मयोगी जनसेवा कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम का मकसद, अधिकारियों को सेवा भाव की भावना को फिर से जगाकर तथा राष्ट्रीय लक्ष्यों और हितधारकों की बेहतर सेवा करने हेतु उनकी क्षमता को, स्पष्टता, उद्देश्य एवं निरंतर प्रतिबद्धता के साथ बढ़ाना था।

भाग लेने वालों को संबोधित करते हुए, डॉ. अनूप दास, निदेशक, भाकृअनुप-आरसीईआर, पटना, ने सार्वजनिक सेवा में सेवा भाव के महत्व पर ज़ोर दिया साथ ही एक सच्चे कर्मयोगी को बनाने में आंतरिक शक्ति और पद की कार्यालयी शक्ति के बीच संतुलन बनाने की ज़रूरत पर प्रकाश डाला।
1.5 घंटे के चार मॉड्यूल में बंटे इस कार्यक्रम ने चिंतनशील सीखने, टीम वर्क और मिलकर समस्या-समाधान को बढ़ावा दिया। इंटरैक्टिव सेशन ने प्रतिभागियों को अपनी आंतरिक क्षमता को पहचानने तथा अपनी प्रोफेशनल भूमिकाओं में एक सक्रिय, सेवा-उन्मुख दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के आखिर में मिले फीडबैक से पता चला कि 80 प्रतिशत से ज्यादा प्रतिभागियों ने सकारात्मक कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने एवं प्रतिबद्ध कर्मयोगी के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत करने के प्रति अपने ज्ञान, दृष्टिकोण और प्रेरणा में महत्वपूर्ण सुधार की पुष्टि की।
वैज्ञानिकों, तकनीकी कर्मचारियों और प्रशासनिक कर्मियों सहित कुल 36 प्रतिभागियों ने क्षमता-निर्माण कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप–पूर्वी क्षेत्र के लिए अनुसंधान परिसर, भाकृअनुप परिसर, पटना, बिहार)







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