15 मई, 2026, कोलकाता
भाकृअनुप–राष्ट्रीय प्राकृतिक रेशा अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (भाकृअनुप-निनफेट), कोलकाता, ने भारत की निर्यात क्षमता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नवीन युग के फाइबर आधारित होम टेक्सटाइल्स के व्यावसायीकरण को गति देने हेतु ट्राइडेंट ग्रुप के साथ रणनीतिक सहयोग की घोषणा की है।
डॉ. डी.बी. शाक्यवार, निदेशक, भाकृअनुप-निनफेट, ने ट्राइडेंट ग्रुप के फंक्शनल हेड डॉ. नेमाई चंद्र राय का संस्थान भ्रमण के दौरान स्वागत किया।
डॉ. शाक्यवार ने उन्हें संस्थान द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों, विस्तार गतिविधियों तथा भविष्य की अनुसंधान दिशाओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की।

डॉ. राय ने प्राकृतिक रेशों की वैश्विक मांग पर प्रकाश डालते हुए अंतरराष्ट्रीय बाजार की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सहयोगात्मक प्रयासों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने वैज्ञानिकों के साथ विस्तृत चर्चा की, विभिन्न प्रयोगशालाओं का भ्रमण किया तथा चल रहे अनुसंधान प्रस्तुतियों पर महत्वपूर्ण सुझाव प्रदान किए।
ट्राइडेंट ग्रुप एवं भाकृअनुप-निनफेट ने संयुक्त अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास तथा टिकाऊ प्राकृतिक रेशा आधारित वस्त्र उत्पादों के व्यावसायीकरण के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने में पारस्परिक रुचि व्यक्त की है। प्रस्तावित सहयोग का उद्देश्य लिनेन प्रेरित कॉटनाइज्ड जूट, हेम्प तथा अलसी रेशा मिश्रणों से संबंधित नवीन प्रौद्योगिकियों को घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य होम टेक्सटाइल उत्पादों में परिवर्तित करना है।

यह सहयोग उन्नत प्रसंस्करण, कॉटनाइजेशन, मिश्रण, कताई, बुनाई तथा फिनिशिंग प्रौद्योगिकियों के माध्यम से प्राकृतिक बास्ट रेशों का उपयोग कर पर्यावरण-अनुकूल एवं उच्च मूल्य वाले वस्त्र सामग्री के विकास पर केंद्रित होगा। प्राकृतिक रेशा अभियांत्रिकी, रेशा निष्कर्षण, रेटिंग, प्रसंस्करण तथा उत्पाद विकास में विशेषज्ञता रखने वाला भाकृअनुप-निनफेट तकनीकी सहयोग एवं अनुसंधान संबंधी सहायता प्रदान करेगा, जबकि ट्राइडेंट ग्रुप औद्योगिक विशेषज्ञता, विनिर्माण क्षमता, उत्पाद विकास तथा बाजार विस्तार में योगदान देगा।
प्रस्तावित साझेदारी से भारत में प्राकृतिक रेशा पारितंत्र को सुदृढ़ करने की अपेक्षा है, जिसके अंतर्गत पारंपरिक रेशों के टिकाऊ विकल्पों को बढ़ावा देना, कृषि अवशेषों में मूल्य संवर्धन करना, ग्रामीण आजीविका को समर्थन प्रदान करना तथा पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी वस्त्र निर्माण को प्रोत्साहित करना शामिल है। यह सहयोग सतत विकास, जैव-अर्थव्यवस्था, आत्मनिर्भर भारत तथा हरित औद्योगिक विकास से संबंधित राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप भी है।
(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय प्राकृतिक रेशा अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, कोलकाता)







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