1 जुलाई, 2026, बेंगलुरु
भाकृअनुप–राष्ट्रीय पशुचिकित्सा महामारी विज्ञान एवं रोग सूचना विज्ञान संस्थान (भाकृअनुप–निवेडी), बेंगलुरु ने अपने परिसर में क्षेत्र के विभिन्न भाकृअनुप संस्थानों के गणमान्य अतिथियों एवं प्रभारी निदेशकों की उपस्थिति में अपना 26वाँ स्थापना दिवस मनाया। कार्यक्रम का शुभारंभ निदेशक एवं गणमान्य अतिथियों द्वारा ध्वजारोहण के साथ हुआ, जिसके पश्चात मुख्य अतिथियों डॉ. नरेंद्र कुमार, आईआरएस (सेवानिवृत्त), पूर्व महानिदेशक, आयकर (अन्वेषण), कर्नाटक एवं गोवा, डॉ. विवेक कपूर, प्रोफेसर, सूक्ष्मजीव विज्ञान एवं संक्रामक रोग, कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज़, पेन स्टेट यूनिवर्सिटी, अमेरिका, तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. डी. हेमाद्री, सहायक महानिदेशक (पशु स्वास्थ्य), भाकृअनुप द्वारा पौधारोपण किया गया।
इस अवसर पर निदेशक की प्रस्तुति में संस्थान की पिछले वर्षों की प्रमुख उपलब्धियों तथा वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों के योगदान को रेखांकित किया गया, जिसके माध्यम से संस्थान को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने तथा देश में पशुधन रोग इंटेलिजेंस के अग्रणी संस्थान के रूप में स्थापित करने की दिशा में किए गए प्रयासों को प्रस्तुत किया गया। साथ ही मुंहपका एवं खुरपका रोग (एफएमडी), पीपीआर, ब्रुसेलोसिस तथा क्लासिकल स्वाइन फीवर (सीएसएफ) जैसे स्थानिक रोगों से मुक्त दर्जा प्राप्त करने के लिए स्पष्ट कार्ययोजना भी प्रस्तुत की गई। संस्थान की वैश्विक संदर्भ प्रयोगशालाएँ (पीपीआर एवं लेप्टोस्पायरोसिस के लिए WoAH रेफरल लैब्स) तथा रोग सूचना विज्ञान प्रणाली प्रारंभिक चेतावनी, जोखिम मानचित्रण एवं सेंटिनल निगरानी में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। इसके अतिरिक्त, प्रभारी पीएमई प्रकोष्ठ ने महामारी विज्ञान, अर्थशास्त्र, निदान एवं रोग सूचना विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों में चल रही अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों तथा भविष्य की प्राथमिकताओं की झलक प्रस्तुत की।

इस अवसर पर डॉ. विवेक कपूर ने “बोझ से मुक्ति तक: निवेड़ी और भारत में पशु स्वास्थ्य का नया विज्ञान” विषय पर स्थापना दिवस व्याख्यान दिया। उन्होंने रिंडरपेस्ट (आरपी) उन्मूलन में भाकृअनुप–निवेडी की उपलब्धियों की सराहना करते हुए वर्तमान चुनौतियों से निपटने के लिए जीनोम आधारित निगरानी जैसे उन्नत उपकरणों तथा रोग-मुक्त दर्जा प्राप्त करने एवं बनाए रखने की नई रणनीतियों पर प्रकाश डाला।
डॉ. नरेंद्र कुमार ने संस्थान के कर्मचारियों को संबोधित करते हुए भारत की समृद्ध पशुधन संपदा तथा पशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण में पशुचिकित्सकों एवं अनुसंधान संस्थानों द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने देशी पशु नस्लों के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ-साथ उनकी उत्पादकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
डॉ. डी. हेमाद्री ने पशु स्वास्थ्य संस्थानों के बीच, विशेषकर एसएमडी के अंतर्गत छोटे संस्थानों की श्रेणी में, संस्थान द्वारा किए गए उल्लेखनीय परिवर्तन एवं सराहनीय योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि संस्थान ने बड़ी संख्या में बाह्य वित्तपोषित परियोजनाओं तथा वैज्ञानिक योगदानों के माध्यम से देश को नियमित रूप से महत्वपूर्ण नीतिगत दिशा-निर्देश उपलब्ध कराए हैं।

कार्यक्रम के अंतर्गत वैज्ञानिक–किसान संवाद, पशुधन स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर चर्चा तथा परामर्श सेवाओं का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर चयनित दुग्ध किसानों को पशुपालन से संबंधित आवश्यक सामग्री वितरित की गई। उत्कृष्ट पशुपालक किसानों को भी गणमान्य अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। इस दिन संस्थान ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले वैज्ञानिकों, प्रशासनिक कर्मचारियों, शोधार्थियों तथा संविदा कर्मचारियों को भी सम्मानित किया, जिन्होंने अपने उत्कृष्ट कार्यों के माध्यम से संस्थान की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस अवसर पर संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट तथा मासिक समाचार पत्रिका सहित कई प्रकाशनों का भी विमोचन किया गया।
(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय पशुचिकित्सा महामारी विज्ञान एवं रोग सूचना विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु)







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