23 जून, 2026, बैरकपुर
वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रयोगशाला गुणवत्ता आश्वासन में उत्कृष्टता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए, भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-सीआईएफआरआई), बैरकपुर ने भारतीय गुणवत्ता परिषद (क्यूसीआई) के घटक निकाय राष्ट्रीय गुणवत्ता संवर्धन बोर्ड (एनबीक्यूपी) के सहयोग से आज ‘गुणवत्ता यात्रा’ पहल के अंतर्गत एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रयोगशाला कार्यप्रणालियों में गुणवत्ता की संस्कृति को बढ़ावा देना, तकनीकी दक्षता को सुदृढ़ करना तथा राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला प्रत्यायन ढाँचों के बारे में जागरूकता उत्पन्न करना था, जिससे अनुसंधान एवं प्रयोगशाला सेवाओं में वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्कृष्टता प्राप्त करने की संस्थान की दिशा को आगे बढ़ाया जा सके।
अपने उद्घाटन संबोधन में डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएफआरआई, ने वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप वैज्ञानिक निष्कर्षों की विश्वसनीयता, भरोसेमंदता तथा व्यापक स्वीकार्यता सुनिश्चित करने के लिए प्रयोगशाला विश्लेषण में उच्चतम मानकों को बनाए रखने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि उत्कृष्टता, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय पहचान प्राप्त करने की आकांक्षा रखने वाले अनुसंधान संस्थानों के लिए सुदृढ़ गुणवत्ता आश्वासन पद्धतियाँ अनिवार्य हैं। उन्होंने आगे यह भी कहा कि प्रयोगशाला गुणवत्ता प्रणालियों को मजबूत करना तथा वैश्विक स्तर पर स्वीकृत प्रत्यायन प्राप्त करना न केवल संस्थान की वैज्ञानिक विश्वसनीयता को बढ़ाएगा, बल्कि भाकृअनुप-सीआईएफआरआई को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में स्थापित करेगा, जो हितधारकों के बीच विश्वास उत्पन्न करने वाले अनुसंधान परिणाम प्रदान करने तथा सतत मत्स्य विकास में योगदान देने में सक्षम होगा।
कार्यक्रम में श्री के. सिरी बाबू, सहायक निदेशक, एनएबीएल, सहित एनबीक्यूपी के अन्य सदस्य संसाधन विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने प्रयोगशाला गुणवत्ता प्रबंधन प्रणालियों को सुदृढ़ करने, तकनीकी दक्षता बढ़ाने तथा परीक्षण एवं अंशांकन प्रयोगशालाओं के लिए राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) प्रत्यायन की रूपरेखा को समझने संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
कार्यक्रम में संस्थान के विभिन्न प्रभागों के अध्यक्षों, प्रधान वैज्ञानिकों, वरिष्ठ वैज्ञानिकों, वैज्ञानिकों, तकनीकी अधिकारियों तथा तकनीशियनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। तकनीकी सत्रों के दौरान संसाधन विशेषज्ञों ने परीक्षण एवं अंशांकन प्रयोगशालाओं के लिए आईएसओ/आईईसी 17025:2017 मानक का अवलोकन प्रस्तुत किया तथा प्रयोगशाला गतिविधियों के लिए एनएबीएल प्रत्यायन प्राप्त करने की ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया की भी जानकारी दी।
संवादात्मक सत्रों के दौरान प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से चर्चा में भाग लिया तथा प्रयोगशाला प्रत्यायन और गुणवत्ता प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
प्रतिभागियों ने कार्यक्रम के दौरान प्रदान किए गए व्यावहारिक मार्गदर्शन की सराहना की तथा कहा कि इस विचार-विमर्श से प्रयोगशाला गुणवत्ता प्रणालियों और एनएबीएल प्रत्यायन प्रक्रिया के प्रति उनकी समझ में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
यह जागरूकता कार्यक्रम भाकृअनुप-सीआईएफआरआई में गुणवत्ता, तकनीकी दक्षता तथा सतत सुधार की संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ, जो मत्स्य अनुसंधान एवं प्रयोगशाला कार्यप्रणालियों में उत्कृष्टता प्राप्त करने के संस्थान के प्रयासों को सुदृढ़ करता है।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर, पश्चिम बंगाल)







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