भाकृअनुप-सीआरआरआई, कटक की टीम ने पौधों के लिए एआई-डिज़ाइन किए गए जीनोम संपादन उपकरण किया विकसित

भाकृअनुप-सीआरआरआई, कटक की टीम ने पौधों के लिए एआई-डिज़ाइन किए गए जीनोम संपादन उपकरण किया विकसित

भाकृअनुप-केन्द्रीय धान अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-सीआरआरआई), कटक, के वैज्ञानिकों ने पौधों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित जीनोम संपादन प्लेटफॉर्मों का सफलतापूर्वक विकास एवं प्रयोगात्मक सत्यापन किया है। इस शोध का केन्द्र प्लांट ओपनक्रिस्पर-1 (Plant OpenCRISPR-1 या POC1) नामक एक नवीन जीनोम संपादन प्लेटफॉर्म का विकास है, जिसे ओपनक्रिस्पर-1 (OpenCRISPR-1 या OC1) नामक एआई-जनित न्यूक्लिएज़ के आधार पर तैयार किया गया है। सीआरआरआई की टीम ने POC1 आधारित बहुउद्देशीय उपकरण विकसित किया हैं, जो जीन नॉकआउट, सटीक बेस एडिटिंग तथा प्राइम एडिटिंग जैसी प्रक्रियाओं में सक्षम हैं।

जीनोम संपादन एक आणविक कैंची (Molecular Scissor) की तरह कार्य करता है, जिससे वैज्ञानिक पौधों के डीएनए में बिना किसी बाहरी जीन को स्थायी रूप से शामिल किए अत्यंत सटीक परिवर्तन कर बेहतर किस्मों का विकास कर सकते हैं। अब तक पौधों में प्रयुक्त जीनोम संपादन उपकरण मुख्य रूप से बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीवों से प्राप्त प्रोटीनों पर आधारित थे। भाकृअनुप के इस शोध ने पहली बार यह प्रदर्शित किया है कि एआई द्वारा डिज़ाइन किए गए एंजाइम पौधों की कोशिकाओं के भीतर प्रभावी रूप से कार्य कर सकते हैं।

पीओसी 1 प्लेटफॉर्म ने धान के कई जीनों में व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले SpCas9 सिस्टम के समान संपादन दक्षता प्रदर्शित की तथा परिवर्तित धान पौधों में सफलतापूर्वक जीन व्यवधान (Gene Disruption) उत्पन्न किया। इसके अतिरिक्त, वैज्ञानिकों ने POC1 आधारित बेस एडिटिंग और प्राइम एडिटिंग उपकरण भी विकसित किए, जिनसे आनुवंशिक अक्षरों (Genetic Letters) को अत्यंत सटीकता से परिवर्तित कर लक्षित फसल सुधार संभव हुआ।

ICAR-CRRI, Cuttack team develops AI-designed genome editors for plants

यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय पौधा विज्ञान पत्रिका New Phytologist में प्रकाशन हेतु स्वीकृत किया गया है। यह उपलब्धि कृषि जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति मानी जा रही है और अगली पीढ़ी की फसल सुधार तकनीकों में भारत की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाती है।

शोधकर्ताओं ने धान को मॉडल फसल के रूप में उपयोग करते हुए यह सिद्ध किया कि एआई-डिज़ाइन किया गया एंजाइम न केवल जीन व्यवधान कर सकता है, बल्कि डीएनए के एकल आधार (Single Base Resolution) स्तर पर भी परिवर्तन करने में सक्षम है।

फसल सुधार के क्षेत्र में इन तकनीकों से अनाज की गुणवत्ता, पोषण मूल्य, तनाव सहनशीलता, रोग प्रतिरोधक क्षमता और जलवायु अनुकूलन जैसे महत्वपूर्ण गुणों को बेहतर बनाने की व्यापक संभावनाएँ हैं। POC1 आधारित बेस एडिटिंग और प्राइम एडिटिंग उपकरणों की सफलता से यह स्थापित हुआ है कि एआई-डिज़ाइन किए गए न्यूक्लिएज़ कृषि के लिए अगली पीढ़ी के जीनोम संपादन प्लेटफॉर्म विकसित करने में प्रभावी और बहुमुखी साधन बन सकते हैं।

चूँकि OpenCRISPR-1 को एक ओपन-सोर्स न्यूक्लिएज़ के रूप में जारी किया गया है और इसे शैक्षणिक अनुसंधान तथा व्यावसायिक लाइसेंसिंग के लिए स्वतंत्र रूप से उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है, इसलिए यह जीनोम संपादन तकनीकों तक व्यापक पहुँच सुनिश्चित करने में मदद कर सकता है और SpCas9 का एक आकर्षक विकल्प बन सकता है।

यह शोध भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) के वित्तीय सहयोग से सम्पन्न हुआ। यह कार्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जीनोम संपादन, जैव-प्रौद्योगिकी और कृषि विज्ञान के संगम पर भारत की उभरती वैज्ञानिक क्षमताओं को दर्शाता है तथा देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता रखता है।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय धान अनुसंधान संस्थान, कटक)

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