25 अप्रैल, 2026, गोवा
भाकृअनुप–कृषि विज्ञान केन्द्र, उत्तर गोवा ने भाकृअनुप–केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोवा, के तत्वावधान में “सतत फसल उत्पादन हेतु मृदा परीक्षण आधारित संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन” विषय पर किसान गोष्ठी का आयोजन किया।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन के महत्व के बारे में जागरूक करना था, ताकि मृदा स्वास्थ्य को बनाए रखते हुए दीर्घकालिक कृषि उत्पादकता बढ़ाई जा सके। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि उर्वरकों का उपयोग सामान्य सिफारिशों के बजाय मिट्टी की वास्तविक पोषक स्थिति के आधार पर उचित प्रकार एवं मात्रा में किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने मृदा परीक्षण की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी, जिससे नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी तथा अधिकता का पता लगाया जा सकता है। इस पद्धति से संतुलित उर्वरक उपयोग संभव होता है, पोषक तत्वों की उपयोग दक्षता बढ़ती है और अनावश्यक लागत में कमी आती है। उन्होंने यह भी बताया कि उर्वरकों का अत्यधिक और असंतुलित उपयोग मृदा की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे अम्लीयता, लवणता, पोषक तत्वों की कमी तथा कार्बनिक पदार्थ में गिरावट जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

कार्यक्रम में एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन के महत्व पर भी जोर दिया गया, जिसमें जैविक खाद, जैव उर्वरक, हरी खाद, फसल अवशेष तथा रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग शामिल है। विशेषज्ञों ने बताया कि मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन एक वैज्ञानिक, किफायती एवं पर्यावरण के अनुकूल तरीका है, जो बेहतर फसल उत्पादन, किसानों की आय में वृद्धि और दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
इस कार्यक्रम में कुल 16 प्रतिभागियों (11 पुरुष एवं 5 महिलाएं) ने भाग लिया, जो किसानों में वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने की बढ़ती रुचि को दर्शाता है।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोवा)







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