21 सितंबर, 2026, बठिंडा, पंजाब
कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), बठिंडा में फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) और किसान संवाद पर किसान मेले का आयोजन किया गया, जहां केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के साथ संवाद किया और सतत तथा लाभकारी कृषि के लिए कृषि-पारिस्थितिकी, संसाधन-आधारित फसल योजना, फसल एवं उद्यम विविधीकरण और कृषि संसाधनों के कुशल प्रबंधन के महत्व पर जोर दिया।
किसानों को संबोधित करते हुए श्री शिवराज सिंह चौहान ने जोर देकर कहा कि फसल योजना विभिन्न क्षेत्रों के प्राकृतिक संसाधन आधार, कृषि-जलवायु परिस्थितियों और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने कृषि-पारिस्थितिकी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें उपलब्ध मृदा और जल संसाधनों के अनुरूप फसल पद्धतियों, प्रौद्योगिकियों और संसाधन-उपयोग की प्रथाओं का उचित समायोजन किया जाए। उन्होंने कहा कि इस तरह की स्थान-विशिष्ट योजना कृषि उत्पादकता और आय को बनाए रखते हुए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में योगदान दे सकती है।
मंत्री ने वैज्ञानिक और संसाधन-आधारित फसल योजना पर अधिक जोर देने का आह्वान किया, जिसमें विविधीकरण और उपयुक्त फसल किस्मों को अपनाना शामिल है। इस संदर्भ में, उन्होंने किसानों को कम अवधि वाली और अनुशंसित धान की किस्मों, जैसे पीआर 126, के साथ-साथ संसाधन-कुशल उत्पादन प्रथाओं को अपनाने पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने जलाने के बजाय उपयुक्त सीआरएम प्रथाओं के माध्यम से फसल अवशेषों के उत्पादक उपयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया, जिससे संसाधन संरक्षण और सतत कृषि में योगदान हो सके।

श्री चौहान ने कृषि अनुसंधान, आधुनिक प्रौद्योगिकियों और किसानों के खेत-स्तरीय अनुभव के बीच संबंध को मजबूत करने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों से केवीके द्वारा प्रदान किए जाने वाले प्रशिक्षण, प्रदर्शनों और परामर्श सेवाओं का सक्रिय रूप से उपयोग करने तथा कृषि वैज्ञानिकों और विस्तार एजेंसियों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने का आग्रह किया।
किसान संवाद के दौरान मंत्री ने किसानों की चिंताओं को सुना और खेत-स्तरीय चुनौतियों के समाधान के लिए केंद्रित अनुसंधान और तकनीकी हस्तक्षेपों का आह्वान किया। उन्होंने सरसों से उत्पादित शहद में क्रिस्टलीकरण की समस्या के लिए उपयुक्त वैज्ञानिक समाधान विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया और किसानों के लाभ को बढ़ाने के लिए फलों एवं सब्जियों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की अधिक संभावनाओं के साथ अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकियों पर जोर दिया।
मंत्री ने कृषि आय बढ़ाने और कृषक परिवारों की आर्थिक मजबूती को सुदृढ़ करने के लिए एकीकृत कृषि प्रणालियों और संबद्ध उद्यमों के महत्व को भी रेखांकित किया। बाद में, उन्होंने प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी का दौरा किया और किसानों से स्थानीय अवसरों, संसाधनों की उपलब्धता और बाजार की संभावनाओं के आधार पर नवीनतम कृषि प्रौद्योगिकियों को अपनाने का आग्रह किया।
मशरूम उत्पादकों के साथ बातचीत करते हुए श्री चौहान ने विपणन से संबंधित उनकी चिंताओं का संज्ञान लिया और मशरूम उत्पादकों तथा अन्य उच्च-मूल्य वाले कृषि उद्यमों के लिए बाजार संपर्क और मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इससे पहले, डॉ. परविंदर श्योराण, निदेशक, आईसीएआर-एटारी, लुधियाना ने किसानों तक पहुंच, प्रौद्योगिकी प्रसार और किसान परामर्श सेवाओं को मजबूत करने के लिए केवीके द्वारा की जा रही गतिविधियों और पहलों के बारे में जानकारी दी।
इस कार्यक्रम ने किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, विस्तार एजेंसियों और सरकारी विभागों के बीच सीधे संवाद के लिए एक मंच प्रदान किया। चर्चाओं में प्राकृतिक संसाधनों और कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप फसल चयन, फसल विविधीकरण और एकीकृत कृषि को बढ़ावा देने, उत्पादक फसल अवशेष प्रबंधन सुनिश्चित करने, मूल्य संवर्धन और बाजार संपर्क को मजबूत करने तथा सतत और लाभकारी खेती के लिए आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकियों को अपनाने की सुविधा प्रदान करने के महत्व को रेखांकित किया गया।
(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोन-1, पीएयू, लुधियाना)







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