21 मई, 2026, कानपुर
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू), कानपुर के स्कूल ऑफ एडवांस्ड एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के कुल 156 विद्यार्थियों ने अपने संकाय सदस्यों के साथ आज एक शैक्षणिक भ्रमण के अंतर्गत आईसीएआर-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी), जोन-III, कानपुर, का दौरा किया। इस अवसर पर संस्थान के सम्मेलन कक्ष में “उर्वरकों के संतुलित उपयोग” विषय पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों का स्वागत करते हुए डॉ. राघवेंद्र सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-अटारी, कानपुर, ने भारतीय कृषि पर एक जानकारीपूर्ण प्रस्तुति दी तथा कृषि विकास में आईसीएआर एवं अटारी की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ संवाद भी किया और उन्हें सतत कृषि के लिए उचित उर्वरक प्रबंधन के महत्व के प्रति जागरूक किया।

विद्यार्थियों को आईसीएआर की कार्यप्रणाली तथा देशभर में प्रौद्योगिकी प्रसार एवं किसान कल्याण के लिए कार्यरत कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) के व्यापक नेटवर्क के बारे में जानकारी दी गई।
कृषि एवं मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन में उर्वरकों के संतुलित उपयोग के महत्व पर एक विस्तृत व्याख्यान दिया गया, जिसमें उर्वरकों के वैज्ञानिक एवं विवेकपूर्ण उपयोग, मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) पद्धतियों तथा फसल उत्पादकता बढ़ाने एवं पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए हरित खाद के महत्व पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों ने वैज्ञानिकों के साथ सक्रिय रूप से संवाद किया तथा कृषि अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता एवं कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसरों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। प्रतिभागियों ने इस शैक्षणिक भ्रमण को अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक एवं लाभकारी बताया।

विद्यार्थियों ने उन क्षेत्रीय इकाइयों का भी भ्रमण किया, जहां प्राकृतिक खेती की पद्धतियों को अपनाया जा रहा है। क्षेत्र भ्रमण के दौरान उन्होंने वैज्ञानिकों के साथ संवाद किया तथा प्राकृतिक खेती के अनेक लाभों जैसे मृदा स्वास्थ्य में सुधार, रासायनिक आदानों पर निर्भरता में कमी, पर्यावरणीय स्थिरता तथा दीर्घकालिक कृषि लाभप्रदता के बारे में जानकारी प्राप्त की।
विद्यार्थियों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर चल रहे गहन अभियान के महत्व तथा कृषक समुदायों के बीच सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका से भी अवगत कराया गया।
(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोन-III, कानपुर)







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