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उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों के कृषकों हेतु रतुआ प्रतिरोधी जीनों से संवर्धित गेहूं की उन्नत किस्म वी.एल. 3040 पहचानी गयी |
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भाकृअनुप-नार्म, हैदराबाद, ने “कृषि-मीडिया समन्वय: सहयोगात्मक संचार को बढ़ाना” विषय पर कार्यशाला का किया आयोजन |
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केन्द्रीय कृषि मंत्री ने पटना, बिहार में किसान-केन्द्रित कृषि प्रौद्योगिकियों पर भाकृअनुप वैज्ञानिकों और राज्य के हितधारकों के साथ किया संवाद |
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अनुसंधान से बाजार तक की राह को सुदृढ़ करना: भाकृअनुप-सिफरी द्वारा आईपीआर एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर कार्यशाला का आयोजन |
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भाकृअनुप-सीआईएआरआई और भाकृअनुप-केवीके, दक्षिण अंडमान ने संयुक्त रूप से भाकृअनुप-कृषि विज्ञान केन्द्र, सिप्पीघाट में सूकर पालन पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का किया आयोजन |
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भाकृअनुप-सिफरी, बैरकपुर ने गंगा सागर में अनुसूचित जाति के मत्स्य पालक किसानों को बीज उत्पादन तथा वैज्ञानिक मत्स्य पालन पर व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर बनाया सशक्त |
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भाकृअनुप-डीडब्ल्यूआर, जबलपुर ने राष्ट्रव्यापी प्रशिक्षण तथा छात्र सहभागिता के माध्यम से पार्थेनियम जागरूकता का किया विस्तार |
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कम समय, अधिक उपज: VL मंडुआ 376 तवांग के किसानों के लिए एक आशाजनक फिंगर मिलेट किस्म के रूप में उभरी |
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65वीं अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान कार्यकर्ता बैठक में महानिदेशक, भाकृअनुप को प्रतिष्ठित श्री वी.एस. माथुर स्मृति पुरस्कार से किया गया सम्मानित |
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डॉ. जे.के. जेना ने भाकृअनुप-सीएमएफआरआई, कोच्चि में एआईएनपी-मेरिकल्चर की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की |
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